मुजफ्फरपुर : हसनचक बंगरा स्थित बारह मीनार मस्जिद में शनिवार को अंजुमन-ए-हाश्मिया कदीमी की ओर से मजलिस-ए-अजा व जुलूसे अलम-ए-मुबारक का आयोजन किया गया.
शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलानासैयद मो काजिम शबीब ने कहा कि कर्बला की जंग मजलूमों की हिमायत व जुल्म के खिलाफ किया गया जिहाद था, जिससे सीख लेतेहुए इमाम हुसैन का नाम लेकर मजलूमों की हिमायत व जुल्म के खिलाफ आवाज उठना चाहिए. जुल्म चाहे किसी भी मुल्क में हो, किसी भी मजहब के साथ हो, उसके खिलाफ डट कर मुकाबला करना चाहिए. बता देना चाहिए कि हम उस हुसैन-ए-मजलूम के मानने वाले हैं, जिन्होंनें अपना भरा घर लूटा दिया. अपना सिर कटा दिया, अपने छह माह के बेटे हजरत अली असगर की कुर्बानी दे दी.
उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन के बड़े बेटे हजरत इमाम सज्जाद व उनकी बहन जनाबे जैनब की कायम की हुई यह मजलिस इस बात की गवाही देता है कि इमाम हुसैन ने कर्बला में की गई जंग जुल्म के खिलाफ जिहाद था. जो आज के जालिमों व उनके जुल्म के खिलाफ कभी न मिटने व दबने वाली आवाज है. मजलिस की निजामत मौलाना सैयद ताहिर हुसैन, सोजख्वानी शब्बीर इमाम गोपालपुरी, पेशख्वानी साहिल जाफरी व सैयद कमर नकवी ने किया.
नाहोख्वानी कमरा मुहल्ला के अंजुमन-ए-हैदरी, चंदवारा के अंजुमन-ए-जाफरिया, ब्रह्मपुरा के अंजुमन-ए-शब्बीरिया व अंजुमन-ए-जाफरिया ईरानी दस्ता, मोहम्मदपुर के अंजुमन-ए-असगरिया व चैनपुर के अंजुमन-ए-इमामिया ने किया. मजलिस के बाद गाजी अब्बास-ए-ब-वफा का अलम-ए-मुबारक का जुलूस बारह मीनार मस्जिद से बरामद कर कर्बला में पहलाम किया गया.
