मुजफ्फरपुर : दाखिले के आधार पर मिलेगा स्कूलों को अनुदान

1000 छात्रों के दाखिले पर मिलेंगे एक लाख रुपये मृत्युंजय मुजफ्फरपुर : सरकारी स्कूलों को अब दाखिले के आधार पर अनुदान मिलेगा. बिहार शिक्षा परियोजना ने इसके लिए नयी नीति जारी की है. इससे पहले सभी स्कूलों को तय राशि हर साल दी जाती थी. शिक्षा परियोजना ने दाखिले में वृद्धि के लिए यह बदलाव […]

1000 छात्रों के दाखिले पर मिलेंगे एक लाख रुपये
मृत्युंजय
मुजफ्फरपुर : सरकारी स्कूलों को अब दाखिले के आधार पर अनुदान मिलेगा. बिहार शिक्षा परियोजना ने इसके लिए नयी नीति जारी की है. इससे पहले सभी स्कूलों को तय राशि हर साल दी जाती थी.
शिक्षा परियोजना ने दाखिले में वृद्धि के लिए यह बदलाव किया है. इस वर्ष नामांकन दर कम होने पर शिक्षा परियोजना ने जिलों को नोटिस भेजा था. सरकारी स्कूलों में खर्च के लिए अब बच्चों का दाखिला बढ़ना होगा. शिक्षा परियोजना ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत पहली से 12वीं तक के लिए दाखिले और उनके लिए तय राशि का पत्र भी जिलों को भेज दिया है.
खर्च की तीन कमेटी करेगी निगरानी
स्कूलों को जो राशि खर्च के लिए मिलेगी उसकी निगरानी के लिए तीन समितियां तय की गयी हैं. विद्यालय शिक्षा समिति, स्कूल प्रबंधन समिति और विद्यालय प्रबंधन व विकास समिति इस खर्च का हिसाब रखेंगी.
बिहार शिक्षा परियोजना ने निर्देश दिया है कि अनुदान की सभी फाइलों का आॅडिट किया जायेगा. सारी फाइलों को स्कूल के हेडमास्टर काे अपने पास सुरक्षित रखना होगा.
विभाग ने जिलों के लिए आवंटन भी तय किया. शिक्षा विभाग ने जिलों के लिए आवंटन भी तय कर लिया है. पहली से आठवीं तक मुजफ्फरपुर जिले को 16 करोड़ 77 लाख रुपये और नौवीं से 12वीं के लिए एक करोड़ 85 लाख रुपये तय किये हैं.
पहले प्राथमिक को पांच और मध्य विद्यालय को मिलते थे साढ़े 12 हजार
पहले प्राथमिक विद्यालय को अनुदान के रूप में पांच हजार सालाना मिलते थे और मध्य विद्यालय को साढ़े 12 हजार की राशि दी जाती थी. हाईस्कूल को विकास मद में 50 हजार रुपये की राशि दी जाती थी.
कितने दाखिले पर कितना अनुदान
दाखिला अनुदान
1 से 15 तक 12,500
16 से 100 25,000
101 से 250 50 हजार
251 से 1000 75 हजार
1000 से ऊपर एक लाख
10% राशि सफाई के लिए करनी है खर्च
सरकारी स्कूलों को मिलने वाले अनुदान की दस प्रतिशत राशि सफाई पर खर्च करनी है. इसका निर्देश भी बिहार शिक्षा परियोजना ने दिया है. खर्च हुई राशि का हिसाब 30 अप्रैल तक स्कूलों को जिला शिक्षा कार्यालय में जमा कर देना है. उपयोगिता प्रमाण पत्र की जांच डीपीओ और कनीय व सहायक अभियंता करेंगे.
इन मदों में सरकार देगी राशि. सरकारी स्कूलों को खराब फर्नीचर व उपकरण बनवाने, रोज के खर्च, खेल सामग्री खरीदने, प्रयोगशाला के लिए सामान खरीदने, बिजली बिल, पानी, इंटरनेट लगवाने, स्कूल भवन मरम्मत करवाने ,स्वच्छता अभियान को बढ़ावा और शिक्षण में काम आने वाली चीजों की खरीद के लिए राशि दी जायेगी.

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