मुंगेर से वीरेंद्र कुमार सिंह की रिपोर्ट: सदर प्रखंड के राजपूताना चौक शीतलपुर में शनिवार की शाम वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई. इस अवसर पर क्षेत्र के युवाओं ने एकजुट होकर मेवाड़ के महान योद्धा के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके अदम्य साहस को याद किया. कार्यक्रम के दौरान पूरा वातावरण देशभक्ति के नारों से गुंजायमान रहा.
मातृभूमि के प्रति त्याग और संघर्ष की दी गई प्रेरणा
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के जीवन संघर्ष पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप स्वाभिमान के ऐसे प्रतीक हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी पराधीनता स्वीकार नहीं की. घास की रोटी खाना स्वीकार किया लेकिन मातृभूमि की रक्षा के लिए मुगलों के आगे सिर नहीं झुकाया. वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि उनका जीवन और शौर्य गाथा आज के युवाओं के लिए मार्गदर्शक है.
युवाओं ने लिया राष्ट्र सेवा का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित युवाओं ने महाराणा प्रताप के पदचिन्हों पर चलने और राष्ट्र व समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाने का सामूहिक संकल्प लिया. देशभक्ति गीतों ने युवाओं में जोश भरने का काम किया. आयोजकों ने बताया कि इस तरह के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराना और उनमें राष्ट्रप्रेम की भावना को जागृत करना है.
समाज निर्माण में महापुरुषों की भूमिका
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक योद्धा नहीं बल्कि एक महान मार्गदर्शक थे. उनके वीरता और स्वाभिमान के आदर्शों को अपनाकर ही एक मजबूत और सशक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है. इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय युवा और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे, जिन्होंने इस आयोजन के माध्यम से वीर शिरोमणि के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की.
