बदहाली : तारापुर व खड़गपुर अनुमंडल अस्पताल व 9 प्रखंडों के पीएचसी में नहीं मिल रही अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा
हवेली खड़गपुर अनुमंडल अस्पताल और तारापुर में संचालित अनुमंडल अस्पताल शामिल हैं
By RANA GAURI SHAN | Updated at :
– निजी अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों के भरोसे जिले में गर्भवती व अन्य मरीज
– सदर अस्पताल में भी केवल गर्भवती के लिए अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा
मुंगेर
लगभग 20 लाख की जनंसख्या, तीन अनुमंडल और 9 प्रखंड वाले मुंगेर जिले में मरीजों और गर्भवति महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए सरकार भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का अलाम यह है कि यहां संचालित 226 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में केवल सदर अस्पताल में ही अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा उपलब्ध है. जबकि तारापुर व खड़गपुर अनुमंडल अस्पताल व 9 प्रखंडों के पीएचसी में यह सुविधा नहीं मिल रही है. जिसके कारण अल्ट्रासाउंड जांच के लिये मरीज या गर्भवती निजी अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों के भरोसे हैं.
जिले में मात्र सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच
मुंगेर जिला मुख्यालय सहित इसके 9 प्रखंडों में कुल 226 सरकारी स्वास्थ्य संस्थान संचालित हैं. इसमें सबसे अधिक 180 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर चल रहे हैं. जबकि 21 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 3 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 8 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तथा 6 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ जिला मुख्यालय में स्थित सदर अस्पताल, हवेली खड़गपुर अनुमंडल अस्पताल और तारापुर में संचालित अनुमंडल अस्पताल शामिल हैं, लेकिन इनमें से केवल जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में ही अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा मरीजों के लिए है. जबकि न तो दोनों अनुमंडल अस्पताल और न ही किसी अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में मरीजों और गर्भवतियों के लिए अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा है.
निजी अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों के भरोसे गर्भवती और मरीज
सरकार भले ही मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा और गर्भवतियों को सुरक्षित प्रसव की सुविधा देने के लिये करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन बदहाल जांच व्यवस्था के कारण जिले के गर्भवती जहां अपने प्रसव के दौरान अल्ट्रासाउंड जांच के लिए निजी जांच केंद्रों के भरोसे है. वही निजी जांच केंद्रों में गर्भवतियों को 2 से 3 हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है. ऐसे में केवल अंदाजा लगाया जा सकता है कि 9 माह के प्रसव के दौरान गर्भवती को तीन बार अल्ट्रासाउंड जांच कराना होता है. जिससे जिले के गर्भवतियों को अपने प्रसव के दौरान केवल अल्ट्रासाउंड जांच के लिये हजारों रूपये खर्च करना पड़ता है. यही हाल सामान्य मरीजों का है. जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर अल्ट्रासाउंड जांच के लिए निजी जांच केंद्रों के भरोसे रहना पड़ता है.
बिना मानक के संचालित हैं अधिकांश अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र
किसी भी अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र को संचालित होने के लिए उसे पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत न केवल निबंधित होना है, बल्कि इसके मानक को पूरा करना है. लेकिन जिले में अधिकांश निजी अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र न तो पीएसीपीएनडीटी एक्ट के तहत निबंधित है और न ही मानक का पालन करते हैं. बता दें कि साल 2023 में तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ पीएम सहाय के कार्यकाल के दौरान जिले में लगातार निजी अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों के विरुद्ध कार्रवाई की गयी थी. जिसमें हवेली खड़गपुर और बरियारपुर सहित कई प्रखंडों में संचालित निजी अल्ट्रासाउंड की जांच कर बिना मानक के संचालित जांच केंद्रों को सील भी किया गया था. यहां तक कि खुद स्वास्थ्य विभाग द्वारा बिना मानक के संचालित कई निजी अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों को बंद कर दिया था. ऐसे में जिले में चल रहे निजी अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र में मरीजों को मिल रहे जांच रिर्पोट का केवल अंदाजा लगाया जा सकता है. हद तो यह है कि सदर अस्पताल में भी केवल गर्भवती के लिए ही अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था है. जो जिले में स्वास्थ्य विभाग के गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे पर बड़ा सवाल खड़ा करता है.
कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ राजू ने बताया कि सदर अस्पताल में गर्भवती व मरीजों के लिए अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था है. जबकि जल्द ही अनुमंडल अस्पताल, तारापुर में भी अल्ट्रासाउंड जांच शुरू हो जायेगा. हलांकि अनुमंडल अस्पताल, हवेली खड़गपुर का निर्माण हाल में हुआ है. जहां कुछ कार्य बांकी है. कार्य पूर्ण होने के बाद वहां भी अल्ट्रासाउंड जांच आरंभ कर दिया जायेगा.