कहारों के कंधों पर निकलती है बड़ी दुर्गा महारानी की शोभायात्रा

कहारों के कंधों पर निकलती है बड़ी दुर्गा महारानी की शोभायात्रा

मुंगेर. मुंगेर में मां दुर्गा प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा का विशेष महत्व है. क्योंकि यहां सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार शादीपुर स्थित बड़ी दुर्गा महारानी, बड़ी मां काली, छोटी दुर्गा व छोटी मां काली की प्रतिमा विसर्जन के लिए कहार डोली पर ले जाते हैं. कहारों के कंधों पर मां की डोली उठती है, लेकिन मार्ग में डोली को कंधा देने के लिए श्रद्धालुओं के बीच होड़ लगी रहती है. विसर्जन शोभा यात्रा का विहंगम दृश्य तब होता है, जब कौड़ा मैदान चौक पर बड़ी माता और छोटी माता का मिलन होता है. इस क्षण को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ वहां घंटो बनी रहती है.

शादीपुर बड़ी दुर्गा महारानी मंदिर से माता की प्रतिमा विजया दशमी की शाम कहारों के कंधों पर निकलती है. परंपरा के अनुसार वहीं कहार माता की डोली को कंधा देते है जिनके पूर्वज सदियों से कंधा देते रहे है. यह एक अनोखी व प्राचीन परंपरा है, जिसमें भक्त मां के दर्शन और उन्हें कंधा देने के लिए लालायित रहते हैं. जिस मार्ग से माता की डोली निकलती है. उसे गंगा जल से धोया जाता है. इस दौरान मार्ग में जगह-जगह रंगोली बनायी जाती है. यहां देवी की आरती की जाती है. माता के एक बार दर्शन करने व आरती देखने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ दशमीं की रात से 11वीं पूजा के दिन भर सड़क पर लगी रहती है. शादीपुर बड़ी दुर्गा स्थान से विसर्जन स्थल सोझी गंगा घाट पहुंचने में माता की डोली को 15 से 20 घंटे तक लग जाती है. जगह-जगह विभिन्न मां की आरती की जाती है. मां को खोईंछा देने के लिए महिलाओं की भीड़ लगी रहती है.

बड़ी मां व छोटी मां के मिलन का दृश्य देखने उमड़ी है भीड़

अंबे चौक से बड़ी मां की प्रतिमा कौड़ा मैदान पहुंती है. वहां पहले से छोटी दुर्गा मां की प्रतिमा पहुंच कर रहती है. जहां बड़ी और छोटी दुर्गा मां मिलन होता है. इस विहंगम दृश्य को देखने को बड़ी संख्या में वहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. इस मिलन के विहंगम दृश्य को देखकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठते है. इस दौरान माता की जयकारा गूंजती है. फल व प्रसाद की बौछार होती है.

विसर्जन मार्ग में शहरवासी करते हैं पुष्प की वर्षा

विसर्जन के जिस रास्ते से मां की शोभायात्रा निकलती है, उस रास्ते को भी शुद्ध जल से साफ किया जाता है. गमगीन आंखों से मां को विदाई देते श्रद्धालु पुष्पों की वर्षा करते हैं. विसर्जन यात्रा में न सिर्फ मुंगेर जिले के बल्कि मुंगेर प्रमंडल के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु विसर्जन शोभा में उमड़ती है.

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Published by: Birendra kumar sing

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