पार्श्वनाथ भगवान के प्रतिमा के साथ निकली मंगल शोभा यात्रा, उमड़ी भीड़

कलश यात्रा जैन भवन से निकलकर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण करते हुये नगर भवन पहुंची.

मुंगेर

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श्रीदिगंबर जैन समाज मुंगेर की ओर से पार्श्वनाथ भगवान के प्रतिमा स्थापन को लेकर चल रहे पंचकल्याणक मांगलिक कार्य के तहत मंगलवार की सुबह जैन भवन से घटयात्रा निकाली गयी. जिसमें बड़ी संख्या में जैन समाज के पुरूष व महिलाओं ने भाग लिया. साथ ही इस यात्रा के दौरान दिगंबर जैन मुनी आचार्य प्रमुख सागर जी महाराज भी अपने संतों के साथ शामिल हुये. जबकि मौके पर नगर भवन में ध्वजारोहण के साथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा का कार्यक्रम प्रारंभ हो गया.

जैन भवन मुंगेर के पूर्वी क्षेत्र में बने नवनिर्मित मंदिर में जैन धर्म के 23 वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा स्थापन के तहत आज प्रात जहां भगवान का अभिषेक किया गया. वही मंगल कलश यात्रा निकली. कलश यात्रा जैन भवन से निकलकर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण करते हुये नगर भवन पहुंची. यात्रा के दौरान जहां आगे-आगे ढ़ोल नगाड़े के साथ जैन धर्म के प्रवर्तकों की प्रतिमा को सिर पर धारण करते हुये लोग चल रहे थे. वही अहिंसा तीर्थ प्रणेता सागर जी महाराज सहित अन्य संत इस कार्यक्रम में शामिल थे. लंबी मंगलयात्रा में महिलाएं अपने सिर पर मंगल कलश धारण की हुयी थी. जो पूरे आयोजन को मनमोहक बनाये हुये थे. कार्यक्रम के संयोजक निर्मल जैन ने बताया कि बुधवार को इस आयोजन के तहत गर्भकल्याणक उत्तरार्द्ध कार्यक्रम होगा. जिसमें प्रात शांतिधारा महायाग मंडल आराधना के साथ ही आचार्य का प्रवचन होना है. जबकि संध्याकाल मंगल स्नान, वस्त्रधारण एवं गर्भकल्याणक संस्कार किया जायेगा. इस आयोजन में पूरे देश से जैन समाज के संत व अनुयायी मुंगेर पहुंचे हैं और मूल कार्यक्रम का आगाज बुधवार से होगा. जबकि 25 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा के साथ कार्यक्रम को संपन्न किया जायेगा. कार्यक्रम को सफल बनाने में सचिव भावेश जैन, सांस्कृतिक प्रमुख अजय जैन, सहसंयोजक राजीव जैन, मनोज जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के अनुयायी भाग ले रहे हैं.

स्वामी निरंजनानंद व जैन मुनि आचार्य के बीच हुई आध्यात्मिक भेंट

मुंगेर : अहिंसा तीर्थ प्रणेता आचार्य प्रमुख सागर जी महाराज मंगलवार को बिहार योग विद्यालय पहुंचे, जहां परमाचार्य परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती से प्रेरक वातावरण में भेंट हुई. परस्पर वार्तालाप के क्रम में स्वामी निरंजनानंद ने आचार्य प्रमुख सागर जी को योगाश्रम के प्रमुख प्रकोष्ठ की जानकारी दी. इस क्रम में स्वामी जी ने बताया कि ””गंगा दर्शन”” अर्थात ””बिहार योग भारती”” अंतरराष्ट्रीय योग विश्वविद्यालय रहा है. जिसकी स्थापना स्वामी शिवानंद जी की प्रेरणा से परमहंस सत्यानंद सरस्वती ने किया था. योगाश्रम की साधना-पद्धति के बारे में जानकारी देते हुए आचार्य प्रमुख सागर जी को स्वयं आसन पर बिठाया. स्वामी जी ने उनसे कहा कि जीवन का अनुशासन और शक्ति योग से ही है. दूसरी और आचार्य प्रमुख सागर जी ने उनसे कहा की सांसों का आवागमन भी जिंदगी है. जिसके लिए जैन धर्म में साधना पद्धति पूर्व के जैन मुनियों ने बताई है. उन्होंने बताया कि अभी तक वे एक लाख किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर चुके हैं. माइनस 5 डिग्री तापमान पर भी उन्होंने यात्रा की. स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने भी उदय योग क्रिया में पंचाग्नि साधना की जानकारी दी. इस अवसर पर संयोजक निर्मल जैन, पद्मश्री विमल जैन मुख्य रूप से मौजुद थे.

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Author: RANA GAURI SHAN

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