मुंगेर के ऐतिहासिक किला परिसर स्थित शहीद स्मारक के सामने शनिवार को राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना और सवर्ण एकता मंच के संयुक्त तत्वावधान में एकदिवसीय धरने का आयोजन किया गया.
धरना स्थल पर जुटे वक्ताओं ने वर्तमान आरक्षण नीति, प्रस्तावित यूजीसी एक्ट और एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट के वर्तमान स्वरूप को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार के खिलाफ तीखी नाराजगी जाहिर की. प्रदर्शनकारियों ने साफ लफ्जों में कहा कि यदि सरकार ने उनकी वाजिब मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो यह आंदोलन सिर्फ मुंगेर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे बिहार में फैलाया जाएगा.
"जातिगत आरक्षण से समाज में असंतोष": आर्थिक आधार पर मिले लाभ
धरना कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के मुंगेर जिलाध्यक्ष नीतीश कुमार ने की:
- समीक्षा की जरूरत: वक्ताओं ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था से समाज के एक बड़े और वास्तविक जरूरतमंद वर्ग में भारी असंतोष और निराशा है.
- आर्थिक कसौटी: प्रदर्शनकारियों ने मांग रखी कि आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था की समग्र समीक्षा की जाए और जाति के बजाय परिवार की आर्थिक स्थिति को आरक्षण का मूल आधार बनाया जाए, ताकि हर वर्ग के निर्धन युवाओं को समान अवसर मिल सके.
- रोजगार व शिक्षा में प्राथमिकता: शिक्षा और सरकारी नौकरियों में केवल आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया.
एससी-एसटी एक्ट की विसंगतियों और UGC एक्ट के विरोध में आवाज
धरने के दौरान वक्ताओं ने कई नीतिगत और कानूनी मुद्दों पर सवाल खड़े किए:
- एससी-एसटी एक्ट का मुद्दा: कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान एससी-एसटी कानून के प्रावधानों का दुरुपयोग निर्दोषों को प्रताड़ित करने के लिए किया जा रहा है, इसलिए इसे समाप्त किया जाए या इसमें ठोस सुरक्षात्मक सुधार किए जाएं.
- यूजीसी एक्ट वापस लेने की मांग: उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रस्तावित यूजीसी नियमों को छात्र और शिक्षक विरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की गई.
बड़ी संख्या में जुटे प्रतिनिधि, आगे बड़े आंदोलन की चेतावनी
धरने में सवर्ण समाज के युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया:
- प्रमुख उपस्थिति: कार्यक्रम में समरेश कुमार सिंह, सुबोध सिंह, सौरभ कुमार, कृष्ण मोहन सिंह, उदय सिंह, नवीन सिंह, प्रेम मोहन सिंह, उमेश सिंह सहित करणी सेना और सवर्ण एकता मंच के दर्जनों पदाधिकारी मौजूद रहे.
- चरणबद्ध आंदोलन का संकल्प: मंच से नेताओं ने ऐलान किया कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से ले, अन्यथा आने वाले दिनों में सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष का दायरा बढ़ाया जाएगा.