चल कार्यालय से जाति प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया को लेकर लोगों का गुस्सा शुक्रवार को सड़क पर दिखा. भारत माता चौक पर बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शन का नेतृत्व वार्ड पार्षद राकेश तिवारी ने किया. लोगों का कहना था कि प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया पहले से ज्यादा मुश्किल हो गयी है. खासकर छात्र-छात्राओं और भूमिहीन परिवारों को इससे परेशानी हो रही है. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर प्रक्रिया जल्द आसान नहीं की गयी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
जमीन नहीं है तो जाति प्रमाण-पत्र कैसे बनेगा?
वार्ड पार्षद राकेश तिवारी ने कहा कि जाति प्रमाण-पत्र बनवाने में जमीन का केवाला मांगे जाने की बात सामने आ रही है. इससे बड़ी संख्या में लोग परेशान हैं. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के पास जमीन है या नहीं, इसका उसकी जाति से कोई लेना-देना नहीं है. भूमिहीन लोगों और किराये के मकान में रहने वाले परिवारों के लिए ऐसी व्यवस्था परेशानी बढ़ाने वाली है. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि गलत तरीके से प्रमाण-पत्र बनवाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सही लोगों को कागजात के नाम पर परेशान नहीं किया जाना चाहिए.
एक साल बाद फिर प्रमाण-पत्र क्यों?
पार्षद प्रतिनिधि गौतम आजाद और दीपक कुमार ने जाति प्रमाण-पत्र की एक साल की वैधता पर भी सवाल उठाया. उनका कहना था कि एक बार जाति प्रमाण-पत्र बनने के बाद उसे स्थायी मान्यता मिलनी चाहिए. एक साल के अंदर किसी व्यक्ति की जाति नहीं बदलती, फिर बार-बार नया प्रमाण-पत्र बनवाने की जरूरत क्यों हो. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रमाण-पत्र की जरूरत विद्यार्थियों को पढ़ाई, छात्रवृत्ति और दूसरी सरकारी योजनाओं में पड़ती है. इसलिए व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे लोगों को बार-बार कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़े. प्रदर्शन में लक्ष्मण कुमार, उत्तम गुप्ता, नवल किशोर, रवि शंकर, दीपक कुमार समेत कई लोग मौजूद रहे.
