– वार्ता के दौरान 4 माह के मानदेय भुगतान की स्वीकृति, मानदेय मिलने तक धरना प्रदर्शन जारी रखेंगे आउटसोर्सिंग कर्मी
मुंगेर17 माह के बकाये मानदेय की मांग को लेकर मुंगेर विश्वविद्यालय के आउटसोर्सिंग कर्मी दूसरे दिन शुक्रवार को भी धरने पर बैठे रहे. जबकि शुक्रवार को विश्वविद्यालय में तालाबंदी कर दिया. जिससे घंटों विश्वविद्यालय के कई अधिकारी व कर्मचारी बाहर की खड़े रह गये. इस दौरान अपने कार्य से विश्वविद्यालय पहुंचे कई विद्यार्थी भी परेशान दिखे. इधर दूसरे दिन आउटसोर्सिंग कर्मियों से कुलपति प्रो. संजय कुमार ने वार्ता की. जिसमें 4 माह के मानदेय भुगतान पर सहमति बनी, लेकिन मानदेय मिलने तक आउटसोर्सिंग कर्मी धरने पर बैठे रहने का निर्णय लिया.
आउटसोर्सिंग कर्मियों ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा सिंडिकेट बैठक में ही 15 अप्रैल तक मानदेय का भुगतान करने का निर्णय लिया गया. लेकिन एक माह बाद भी मानदेय का भुगतान नहीं किया गया. इस बीच नये वित्त पदाधिकारी द्वारा भी पूर्व के चार माह तथा वर्तमान के एक माह के मानदेय भुगतान का आश्वासन दिया गया, लेकिन पांच माह के मानदेय का भुगतान भी विश्वविद्यालय द्वारा नहीं किया गया. उन्होंने बताया कि 17 माह से बिना मानदेय के अब आउटसोर्सिंग कर्मियों के समक्ष आर्थिंक तंगी की समस्या आ गयी है.आउटसोर्सिंग कर्मियों ने विश्वविद्यालय में जड़ा ताला
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सुबह 10.30 बजे आउटसोर्सिंग कर्मियों ने विश्वविद्यालय मुख्यालय के मेन गेट पर ताला जड़ दिया. साथ ही विश्वविद्यालय के बाहर धरने पर बैठ गये. इस दौरान कुलसचिव को छोड़कर अन्य अधिकारी बाहर ही रह गये. जबकि इस दौरान कई कर्मचारी भी बाहर ही रह गये. अपराह्न 1 बजे कुलपति प्रो. संजय कुमार विश्वविद्यालय पहुंचे. जिसके बाद आउटसोर्सिंग कर्मियों द्वारा मुख्यालय के मेन गेट का ताला खोला गया.मानदेय मिलने तक धरना रहेगा जारी
आउटसोर्सिंग कर्मियों ने बताया कि कुलपति द्वारा दूसरे दिन शुक्रवार को वार्ता के लिये बुलाया गया. जिसमें कहा गया कि चार माह के मानदेय का भुगतान कर दिया जायेगा. ऐसे में आउटसोर्सिंग कर्मी धरना समाप्त कर कार्य पर वापस लौट जायें, लेकिन आउटसोर्सिंग कर्मियों द्वारा निर्णय लिया गया है कि वार्ता के निर्णय के अनुसार जबतक चार माह के मानदेय का भुगतान नहीं किया जाता है, तबतक आउटसोर्सिंग कर्मियों का धरना जारी रहेगा. कर्मियों ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा बार-बार आश्वासन दिया जाता है, लेकिन मानदेय नहीं दिया जाता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
