Munger News: विश्वविख्यात चित्रकार और आधुनिक भारतीय कला के शिल्पकार माने जाने वाले आचार्य नंदलाल बसु की जन्मभूमि हवेली खड़गपुर आज भी उनके नाम पर प्रस्तावित कला शोध संस्थान और संग्रहालय का इंतजार कर रही है. वर्ष 2003 में बड़े उत्साह के साथ जिस संस्थान और सभागार का शिलान्यास किया गया था, वह दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कागजों से आगे नहीं बढ़ सका. हालात यह हैं कि जहां कभी शोध संस्थान बनने की उम्मीद थी, वहां आज केवल घास-फूस उगी हुई है.
स्थानीय कला प्रेमियों और शिक्षाविदों का कहना है कि यह सिर्फ एक अधूरी इमारत की कहानी नहीं, बल्कि देश के महान कलाकार की विरासत के प्रति उदासीनता का प्रतीक भी है. जिस कलाकार की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है, उसकी जन्मभूमि में आज उनकी एक भी मूल कलाकृति संरक्षित नहीं है.
2003 में हुआ था शोध संस्थान का शिलान्यास
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ. रामाश्रय प्रसाद यादव ने 3 दिसंबर 2003 को हवेली खड़गपुर स्थित हरि सिंह महाविद्यालय परिसर में आचार्य नंदलाल बसु कला शोध संस्थान एवं सभागार की आधारशिला रखी थी.
उस समय यह योजना कला शोध, संरक्षण और नंदलाल बसु की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी. शिलान्यास समारोह में तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य स्व. उमेश कुमार उग्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी.
सीनेट में प्रस्ताव के बाद मिली थी मंजूरी
बताया जाता है कि वर्ष 2003 में हरि सिंह महाविद्यालय के तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य स्व. उमेश कुमार उग्र ने, विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य के रूप में, नंदलाल बसु की कलाकृतियों के संरक्षण और शोध संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव रखा था.
तत्कालीन कुलपति डॉ. रामाश्रय प्रसाद यादव ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए सीनेट से अनुमोदन दिलाया और महाविद्यालय परिसर में शोध संस्थान तथा सभागार बनाने की स्वीकृति दी.
Munger News: 23 साल बाद भी नहीं रखी गई एक भी ईंट
शिलान्यास के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा, लेकिन समय बीतता गया और परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी.
आज स्थिति यह है कि प्रस्तावित स्थल पर भवन का कोई नामोनिशान नहीं है. निर्माण स्थल पर केवल बड़े-बड़े घास उग आए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई.
जन्मभूमि में नहीं है नंदलाल बसु की एक भी कलाकृति
कला प्रेमियों के लिए सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध आचार्य नंदलाल बसु की जन्मभूमि हवेली खड़गपुर में उनकी एक भी कलाकृति संरक्षित नहीं है.
राजा रवि वर्मा, पाब्लो पिकासो और लियोनार्डो दा विंची जैसे महान कलाकारों की श्रेणी में गिने जाने वाले नंदलाल बसु की स्मृतियों को संजोने के लिए अब तक न तो संग्रहालय बन सका और न ही शोध संस्थान.
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यह संस्थान बनता तो यह न केवल कला शोध का प्रमुख केंद्र बनता, बल्कि सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई पहचान मिलती.
कला प्रेमियों ने फिर उठाई निर्माण शुरू करने की मांग
पूर्व प्राचार्य प्रो. रामचरित्र सिंह, प्रो. महेश चंद्र चौरसिया, अशोक सिंह, प्रदीप पाल, रजनीश झा, अंजनी कुमार, पंकज यादव, शिव प्रकाश फंटूश सहित कई शिक्षकों, छात्रों और कला प्रेमियों ने मांग की है कि हरि सिंह महाविद्यालय परिसर में प्रस्तावित शोध संस्थान और सभागार का निर्माण जल्द शुरू किया जाए.
उनका कहना है कि नंदलाल बसु की विरासत को संरक्षित करना केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है.
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