लापरवाही : भूकंप जोन 04 में शामिल है मुंगेर, बावजूद बिना नक्शा खड़ी हो रही अट्टालिकाएं

बिना मानक व नक्शा के भवनों का निर्माण आने वाले समय में मुश्किल पैदा कर सकता है

पांच वर्ष में निगम से मात्र 367 नक्शा हुआ पास, बिना अनुमति का बनाया जा रहा बैसमेंट

जी प्लस टू तक भवन बनाने का ही बनता है नक्शा, बन रही बहुमंजली इमारतें

मंगेर

मुंगेर शहर भूकंप के सिस्मिक जोन 04 में है. जहां भूकंप की तीव्रता 5 से 6 रहने का हमेशा अनुमान रहता है. बावजूद शहर में बहुमंजिली इमारतें बनाने की होड़ लगी है. बिना नक्शा के ही शहर में अट्टालिका खड़ी की जा रही है. बिना मानक व नक्शा के भवनों का निर्माण आने वाले समय में मुश्किल पैदा कर सकता है. बावजूद इसके न तो मकान बनाने वाले लोग नक्शा पास कराने की जरूरत समझ रहे और न ही निगम प्रशासन ऐसे मामलों में गंभीर है. हद तो यह है कि यहां बिना अनुमति के ही सैकड़ों की संख्या में बैसमेंट तैयार किया गया है.

पांच वर्ष में बना मात्र 367 नक्शा, खड़ी की गई हजार अट्टालिका

नगर निगम में नक्शा का फाइल देखने वाले कर्मचारी की माने तो पिछले पांच वर्ष में मुंगेर नगर निगम के 45 वार्ड में मात्र 367 लोगों ने ही नक्शा के लिए आवेदन किया और सभी का नक्शा पास कर दिया गया है. यहां जी प्लस टू तक भवन बनाने का ही नक्शा दिया जाता है. वर्ष 2025 में मात्र अब तक 46 आवेदन प्राप्त हुआ और सभी का नक्शा पास कर दिया गया. सूत्रों की माने तो खास माहाल की जमीन पर नक्शा पास नहीं होता है, इसलिए खास महाल वालों का आवेदन ही निगम में नहीं लिया जाता है. अब सवाल यह उठता है कि जब यहां नक्शा पांच वर्ष में मात्र 367 पास हुए तो शहर में हजार की संख्या में अट्टालिकाएं कैसे खड़ी हो रही है. पांच वर्ष की बात करें तो यहां कई बड़े मॉल खोले गये, चार से पांच मंजिला तक मकान बनाया गया है. यानी शहर में जितने भी मकान जी प्लस थ्री व फोर का बना हुआ है वह पूरी तरह से अवैध है.

नियमों को ताख पर रख कर बन रही बहुमंजली इमारतें

वर्ष 1934 में आए भूकंप से तबाही का मंजर मुंगेर देख चुका है. जब सारा शहर मलबा में तब्दील हो गया था और 1430 लोगों की मौत मलबा में दबने से हाे गई थी. इसके बाद 1988 में भी भूकंप ने काफी तबाही मचाई थी. बावजूद हम भूकंप जैसी आपदा को नजरअंदाज करते हुए बिना सोचे समझे उंची-उंची इमारतों का निर्माण करने से बाज नहीं आ रहे हैं. निगम की माने तो यहां निगम द्वारा जी प्लस टू तक का ही नक्शा पास किया जाता है. अगर कसी को जी प्लस फोर का नक्शा लेना है उसके लिए कुछ नियम को पूरा करना पड़ता है. जहां 40 फीट का सड़क होगा, वहीं पर जी प्लस टू से ऊपर मकान बनाने का नक्शा मिलेगा. लेकिन निगम से जी प्लस टू का नक्शा पास करवा कर लोग जी प्लस्-4,5 तक का मकान निर्माण कर रहे है. लेकिन नक्शा पास करने के बाद निगम अपनी जबावदेही का श्रतिश्री कर लेते है. बहुमंजिला भवन का निर्माण भूकंप रोधी हो रहा है या नहीं इसकी मॉनिटरिंग तक नगर निगम द्वारा नहीं की जाती.

धड्ल्ले से बन रहा बेसमेंट, निगम प्रशासन ने साधी चुप्पी

शहर में बेसमेंट का धड़ल्ले से निर्माण किया जा रहा है. बेसमेंट निर्माण के लिए नक्शा पास होने की प्रक्रिया काफी जटिल है. भवन उपविधि 2104 के प्रावधान के अनुसार अंडरग्राउंड भवन निर्माण का नक्शा पास करने के लिए जमीन से सटे 12 फीट सड़क का होना जरूरी है. पर्यावरण एवं वन विभाग और फायर ब्रिगेड (अग्निशमन विभाग) का अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना जरूरी है. यही कारण है कि बेसमेंट के लिए नक्शा पास होने की जटिल प्रक्रिया के कारण पिछले चार साल में मात्र दो लोगों को बेसमेंट निर्माण का नक्शा दिया गया है. एक बेसमेंट निर्माण की स्वीकृति निगम ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में एक और 2022-23 में एक लोगों को स्वीकृति दी है. लेकिन जब शनिवार से फाइल डील करने वाले कर्मी से बैसमेंट निर्माण के नक्शा पास की रिपोर्ट मांगी तो, उन्होंने कहा कि यहां से एक भी बेसमेंट का नक्शा पास नहीं हुआ है. लेकिन शहर में 100 से अधिक प्रतिष्ठान, दुकान और मकान में बेसमेंट बना मिलेगा. कई ऐसी जगहों पर भी बेसमेंट का निर्माण कराया गया है जहां मात्र पांच फीट चौड़ी सड़क है.

कब कितनी तीव्रता का आया है भूकंप

15 जनवरी 1934 को 8.5

11 जनवरी 1962 को 6.0

21 अगस्त 1988 को 6.7

18 सितंबर 2011 को 5.7

25 अप्रैल 2015 को 7.9

28 अप्रैल 2015 को 6.8

4 जनवरी 2016 को 6.9

कहते हैं नगर आयुक्त

नगर आयुक्त शिवाक्षी दीक्षित ने बताया कि बिना नक्शा पास कराये भवन और बेसमेंट का निर्माण करना नियम के विरुद्ध है. निगम प्रशासन शीघ्र ही टीम गठित कर इसकी जांच करायेंगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. ——————————–

निगम के रिकार्ड में किस वर्ष कितना नक्सा हुआ पास

साल पास नक्शा की संख्या

2021 68

2022 74

2023 113

2024 66

2025 46

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Published by: Birendra kumar sing

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