गंगा के जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि ने मुंगेर जिले में बाढ़ का संकट गहरा दिया है. शुक्रवार सुबह गंगा का जलस्तर 39.36 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 39.33 मीटर से तीन सेंटीमीटर ऊपर है. रातभर में जलस्तर में 26 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है. नदी का पानी बढ़ने के साथ दियारा क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है. प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है.
जफरनगर-कुतलूपुर के गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
जलस्तर बढ़ने के साथ जफरनगर, कुतलूपुर और टिकरमपुर पंचायत के कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने लगा है. घरों के आसपास पानी फैलने के बाद लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. बाढ़ प्रभावित परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं.
पलायन कर रहे लोग अपने साथ मवेशी, पशु चारा, अनाज और जरूरी सामान भी लेकर निकल रहे हैं. ग्रामीणों को चिंता है कि यदि गंगा के जलस्तर में इसी रफ्तार से वृद्धि जारी रही तो और अधिक इलाकों में पानी प्रवेश कर सकता है.
लाल दरवाजा में पहुंचा पानी, संपर्क पथ पर बढ़ा खतरा
गंगा के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण नदी का दबाव नए इलाकों पर बढ़ रहा है. मुंगेर शहर के लाल दरवाजा क्षेत्र में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है.
श्रीकृष्ण सेतु को शहर से जोड़ने वाले लाल दरवाजा गीताबाबू रोड संपर्क पथ तक पानी पहुंच गया है. जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी रहने पर इस महत्वपूर्ण मार्ग से शहर का संपर्क प्रभावित होने की आशंका बढ़ गयी है. इससे आसपास के लोगों की चिंता भी बढ़ गयी है.
22 राहत शिविर और 20 से अधिक नावें तैयार
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है. जिलाधिकारी के निर्देश पर जिले के सभी 22 राहत शिविरों को बाढ़ पीड़ितों के लिए तैयार रखा गया है. प्रभावित क्षेत्रों में 20 से अधिक नावों का परिचालन कराया जा रहा है.
प्रशासन की टीमें लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. दियारा क्षेत्र से पलायन कर रहे बड़ी संख्या में बाढ़ पीड़ितों ने किला परिषद स्थित बाबा घाट के आसपास शरण ली है. पीड़ित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का सिलसिला जारी है.
गंगा के और बढ़ने की संभावना से बढ़ी चिंता
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा के जलस्तर में अभी और वृद्धि होने की संभावना है. इससे प्रशासन के साथ ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ गयी है. जलस्तर बढ़ने की स्थिति में निचले इलाकों में पानी फैलने की आशंका बनी हुई है.
प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, नाव और राहत शिविरों की व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है. वहीं ग्रामीण भी बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की तैयारी में जुटे हैं.
