जमालपुर (मुंगेर). गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचते ही जमालपुर प्रखंड के रिहायशी इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. शुक्रवार की सुबह से पानी तेजी से फैलने के कारण प्रभावित पंचायतों में दहशत का माहौल है. कई घरों में घुटने भर पानी घुस गया है, जिससे लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है. चूल्हे बुझने के बाद कई परिवार छत पर खाना बनाने को मजबूर हैं. निचले इलाकों से लोग सामान लेकर ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं.
सिंघिया, परहम और इंदरुख पश्चिमी पंचायत में तेजी से फैल रहा पानी
बाढ़ का असर जमालपुर प्रखंड की सिंघिया, परहम और इंदरुख पश्चिमी पंचायत में सबसे अधिक देखने को मिल रहा है. इंदरुख पश्चिमी पंचायत के वार्ड संख्या 1, 2 और 5 पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, जबकि पंचायत के अन्य वार्ड भी बाढ़ से प्रभावित हैं. पंचायत के निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है और कई मोहल्लों की गलियों में ठेहुना भर पानी जमा हो गया है.
घरों में घुसा घुटने भर पानी, छत पर खाना बनाने को मजबूर लोग
प्रखंड किसान सलाहकार समिति के अध्यक्ष एवं वार्ड संख्या 6 के प्रतिनिधि संजय कुमार ने अंचल अधिकारी से प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक किचन शुरू कराने और बाढ़ राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है. उन्होंने बताया कि कई बाढ़ प्रभावित वार्डों में लोगों के घरों में घुटने तक पानी घुस गया है. पानी भरने के कारण लोगों के चूल्हे बुझ गये हैं और परिवारों को छत पर खाना बनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
रोजमर्रा के सामान के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे लोग
बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ निचले इलाकों में रहने वाले परिवार अपने जरूरी सामान और कीमती वस्तुओं को लेकर सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों की ओर जाने लगे हैं. लोगों को घर में रखे अनाज और पशुओं की भी चिंता सताने लगी है. ग्रामीणों का कहना है कि पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में परेशानी और गंभीर हो सकती है.
12 घंटे में बदल गयी स्थिति, सुलोचना देवी ने बतायी परेशानी
इंदरुख पंचायत के वार्ड संख्या 5 की सुलोचना देवी ने कहा कि पहले खेतों में पानी फैला हुआ था, इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि इस बार बाढ़ का पानी घर तक नहीं पहुंचेगा. लेकिन महज 12 घंटे के अंदर स्थिति पूरी तरह बदल गयी. उन्होंने कहा कि बाढ़ के पानी ने घर की सुख-शांति छीन ली है और अब परिवार की पूरी गृहस्थी को लेकर चिंता सताने लगी है.
जलस्तर और बढ़ा तो कई और टोले-मोहल्ले होंगे प्रभावित
ग्रामीणों ने आशंका जतायी है कि यदि गंगा के जलस्तर में थोड़ी और वृद्धि हुई तो कई नए टोले और मोहल्ले बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं. ऐसी स्थिति में प्रभावित परिवारों के सामने पलायन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा. लोगों ने प्रशासन से तत्काल बाढ़ राहत सामग्री का वितरण कराने और पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराने की मांग की है.
सामुदायिक किचन और राहत सामग्री की मांग
बाढ़ प्रभावित लोगों ने प्रशासन से सामुदायिक किचन की व्यवस्था करने, जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने और पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए राहत एवं बचाव की तैयारी पहले से मजबूत करना जरूरी है.
