– फाइलेरिया कार्यक्रम के तहत केवल मरीजों को दवा खिलाने तक ही सिमटा मुंगेर स्वास्थ्य विभाग
– अपर मुख्य सचिव ने आयुष्मान योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में होगा मरीजों का ऑपरेशनमुंगेर
सरकार द्वारा सभी जिलों को साल 2025 तक सभी हाइड्रोसील मरीजों का ऑपरेशन करने का लक्ष्य रखा गया है. ऐसे में लगभग तीन साल से बिना सर्जन चिकित्सक के ही मुंगेर स्वास्थ्य विभाग जिले के 859 हाइड्रोसील के मरीजों के ऑपरेशन का लक्ष्य कैसे पूरा करेगा, यह खुद अब मुंगेर स्वास्थ्य विभाग के लिये बड़ा सवाल बन गया है. हलांकि स्वास्थ्य विभाग सरकार से सर्जन मिलने तक आयुष्मान भारत योजना से टैग जिले के निजी नर्सिंग होम के भरोसे अपना लक्ष्य पूरा करने की तैयारी कर रहा है, लेकिन इसमें भी जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डल कार्ड निर्माण की बदहाल स्थिति के कारण स्वास्थ्य विभाग की परेशानी बढ़ने वाली है.बता दें कि सरकार द्वारा साल 2025 तक जिले में सभी हाइड्रोसील मरीजों के ऑपरेशन को पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है. जिसे लेकर जिले में अबतक कुल 859 हाइड्रोसील के मरीजों को चिन्हित किया गया है. जिसका ऑपरेशन अगले साल तक स्वास्थ्य विभाग को कराना है. ऐसे में अब तीन साल से बिना सर्जन के चल रहे मुंगेर जिले के लिये मुश्किलें बढ़ने वाली है. जबकि मरीजों के लिये तो पिछले तीन साल से यह मजबूरी अब आदत बन गयी है. जिसके कारण ही अब जिले में अवैध निजी नर्सिंग होम की पकड़ भी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर बढ़ने ली है.
निजी नर्सिंग होम के भरोसे हाइड्रोसील ऑपरेशन का कैसे पूरा होगा लक्ष्य
बता दें कि सरकार से मिले लक्ष्य को पूरा करने के लिये अब मुंगेर स्वास्थ्य विभाग आयुष्मान भारत योजना के तहत टैग जिले के निजी नर्सिंग होम के भरोसे तैयारी कर रहा है. जिससे स्वास्थ्य विभाग के साथ मरीजों की परेशानी भी बढ़ेगी, क्योंकि आयुष्मान भारत योजना से टैग निजी नर्सिंग होम में केवल आयुष्मान योजना के तहत गोल्डन कार्डधारी मरीजों को ही निशुल्क ऑपरेशन की सुविधा मिलेगी. जबकि बिना कार्ड वाले मरीजों को पैसे खर्च कर अपना हाइड्रोसील ऑपरेशन कराना होगा, क्योंकि जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डल कार्डधारियों की स्थिति भी बदहाल है. हाल यह है कि जिले में अबतक 7 लाख से अधिक लाभुकों में केवल 3 लाख लाभुकों को ही गोडल्न कार्ड मिल पाया है.
तीन साल से बिना सर्जन के चल रहा मुंगेर
लगभग 20 लाख की जनसंख्या वाला मुंगेर जिला पिछले तीन साल से बिना सर्जन के ही चल रहा है. हद तो यह है कि तीन साल से जनरल सर्जन के साथ हड्डी के सर्जन का भी टोटा बना है. बता दें कि साल 2021 तक सदर अस्पताल में जनरल सर्जन के रूप में डॉ शाहीद मुर्तुजा थे. जबकि इसके अतिरिक्त तारापुर में एक सर्जन डॉ कुंदन थे. जिसमें अगस्त 2021 में पहले जनरल सर्जन के रूप में डॉ शाहीद मुर्तुजा इस्तीफा देकर सदर अस्पताल से चले गये. जबकि 2021 नवंबर माह में जिले में एकमात्र बचे सर्जन डॉ कुंदन भी दूसरी जगह नौकरी होने पर इस्तीफा देकर चले गये. हलांकि इसके बाद साल 2024 के जुलाई माह में मुंगेर शहर के शहरी एपीएचसी भगत सिंह चौक पीपलपांती रोड स्थित लेडी स्टेफिंस में जनरल सर्जन डॉ राहुल पटेल को नियुक्त किया गया, लेकिन अब दो माह की नौकरी के बाद ही सितंबर 2024 में सर्जन डॉ राहुल पटेल भी पीजी की पढ़ाई करने के लिये जिले से चले गये हैं. ऐसे में अब पूरा मुंगेर जिला बिना सर्जन के ही चल रहा है.
कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार सिन्हा ने बताया कि दीपावली के बाद विभाग द्वारा सर्जन दिये जाने का आश्वासन दिया गया है. जिससे हाइड्रोसील सहित अन्य मरीजों का ऑपरेशन भी हो पायेगा. जबकि लक्ष्य को पूरा करने के लिये तबतक आयुष्मान भारत योजना के तहत टैग निजी नर्सिंग होम की मदद ली जायेगी. जिसके लिये विभाग द्वारा निर्देशित किया गया है.
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जिले में प्रखंडवार हैड्रोसिल मरीजों की संख्या
प्रखंड हाइड्रोसिल के मरीज
असरगंज 82बरियारपुर 95
धरहरा 42हवेली खड़गपुर 55
जमालपुर 13मुंगेर सदर 83
मुंगेर शहरी 331संग्रामपुर 28
तारापुर 51टेटियाबंबर 79
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