सुविधा बढ़ी नहीं, 197.71 करोड़ बढ़ गया एक साल में एमयू का बजट

कॉलेजों के बदहाल आधारभूत संरचनाओं व शैक्षणिक व्यवस्थाओं में भले ही एक साल में कोई सुधार नहीं हुआ हो, लेकिन एक साल में विश्वविद्यालय का बजट जरूर 197.71 करोड़ बढ़ गया है.

न पीजी विभागों को मिला स्थायी शिक्षक व कर्मी, न स्थायी भवन

कॉलेजों में भी बदहाल कक्षाएं, प्रयोगशाला व लाइब्रेरी की स्थिति दयनीय

मुंगेर. मुंगेर विश्वविद्यालय और उसके कॉलेजों के बदहाल आधारभूत संरचनाओं व शैक्षणिक व्यवस्थाओं में भले ही एक साल में कोई सुधार नहीं हुआ हो, लेकिन एक साल में विश्वविद्यालय का बजट जरूर 197.71 करोड़ बढ़ गया है. जबकि एमयू के पीजी विभागों को न तो अबतक स्थायी रूप से शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मी मिल पाये और न ही इन पीजी विभागों को अपना स्थायी भवन और फंड मिल पाया है. हद तो यह है कि करोड़ों का प्रत्येक साल बजट बनने के बाद एमयू के कॉलेजों में कक्षाएं, प्रयोगशाला व लाइब्रेरियों की स्थिति अब तक बदहाल ही है.

सीनेट बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट किया गया पारित

एमयू द्वारा शुक्रवार को सीनेट बैठक में अपने लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट पारित किया गया, जो कुल 1070.45 करोड़ रूपये के घाटे का बजट है. जो वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में 197.71 करोड़ रूपये ज्यादा है. बता दें कि एमयू द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 896 करोड़ 25 लाख 74 हजार 192 रुपये का बजट बनाया गया था. जिसमें विश्वविद्यालय की आमदनी 23 करोड़ 51 लाख 47 हजार 440 रूपये होने के बाद विश्वविद्यालय द्वारा 872 करोड़ 74 लाख 26 हजार 752 रूपये के घाटे का बजट पास किया गया, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विश्वविद्यालय द्वारा कुल 1098 करोड़ 72 लाख 47 हजार 542 रूपये का बजट बनाया गया है. जिसमें विश्वविद्यालय की आमदनी कुल 28 करोड़ 27 लाख 9 हजार 365 रूपये है, जिससे वित्तीय वर्ष में एमयू का बजट 1070 करोड़ 45 लाख 38 हजार 177 घाटे का है, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में 197 करोड़ 71 लाख 11 हजार 425 रूपये अधिक है.

बजट बढ़ने के बावजूद नहीं बढ़ी सुविधाएं

एमयू का बजट भले ही एक वित्तीय वर्ष में 197.71 करोड़ रूपये बढ़ गया है, लेकिन इस दौरान एमयू और उसके कॉलेजों की बदहाल व्यवस्थाओं में न तो सुधार हुआ है और न ही छात्र-छात्राओं के लिए सुविधाएं बढ़ी है. बता दें कि एमयू के 20 पीजी विभाग अबतक जहां मुख्यालय के कॉलेजों में उधार के भवनों में चल रहा है. वहीं इन पीजी विभागों को न तो अबतक स्थायी शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी मिल पाये हैं. हद तो यह है कि इन पीजी विभागों के लिए प्रत्येक वर्ष विश्वविद्यालय द्वारा फंड तो बजट में दिया जाता है, लेकिन यह फंड केवल विश्वविद्यालय के बजट तक ही रह जाता है. इतना ही नहीं एमयू के अधिकांश अंगीभूत कॉलेजों में न तो विद्यार्थियों के लिए सुविधाजनक कक्षाएं है और न ही शौचालय व अन्य सुविधाएं. जबकि सालों से इन कॉलेजों में प्रयोगशालाएं और लाइब्रेरी पूरी तरह बदहाल है.

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By RANA GAURI SHAN

RANA GAURI SHAN is a contributor at Prabhat Khabar.

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