एईडीओ परीक्षा में पकड़े गये सॉल्वर गैंग मामले में ईओयू की इंट्री, एसआइटी का गठन

बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी परीक्षा से पहले और परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्र से मुंगेर पुलिस ने सॉल्वर गैंग के 22 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था.

मुंगेर पुलिस ने चार सॉल्वर व 22 परीक्षार्थी को गिरफ्तार कर भेजा था जेल, मुफस्सिल थाने में दर्ज है प्राथमिकी

मुंगेर. बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी परीक्षा से पहले और परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्र से मुंगेर पुलिस ने सॉल्वर गैंग के 22 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था. इसको लेकर मुफस्सिल थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. जिसका अनुसंधानकर्ता पुलिस पदाधिकारी मुफस्सिल थानाध्यक्ष को बनाया गया है. लेकिन अब इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने इंट्री की है, जो इस मामले की जांच करेंगी.

नौ सदस्यीय टीम में एसपी व डीएसपी रैंक के अधिकारी हैं शामिल

जानकारी के अनुसार, ईओयू परीक्षा में फर्जीवाड़े गिरोह के खिलाफ मुफस्सिल थाने में कांड संख्या 177/26 दर्ज है. मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) को इंट्री दिया गया है. जो इस कांड की जांच करेंगी और गैंग के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का काम करेंगी. मिली जानकारी के अनुसार ईओयू के एडीजी नैययर हसनैन खान ने एक नौ सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है. जिसकी जिम्मेदारी ईओयू के एसपी (प्रशासन) राजेश कुमार को सौंपी गयी है, जबकि जांच दल में एक डीएसपी जाकिर हुसैन एवं पांच इंस्पेक्टर को शामिल किया गया है. जिसकी जिम्मेदारी साक्ष्य एकत्रित कर सिंडिकेट में शामिल सदस्यों के खिलाफ प्रभारी कार्रवाई करना है. बताया गया कि ईओयू की टीम शीघ्र मुंगेर आयेगी और कांड के अनुसंधानकर्ता पुलिस पदाधिकारी से उनके द्वारा किये गये अब तक के अनुसंधान की जानकारी लेगी. इधर ईओयू की इंट्री होने से सिंडिकेट में शामिल सदस्यों के बीच खलबली मच गयी है.

13 अप्रैल की रात जिला और पुलिस प्रशासन ने की थी बड़ी कार्रवाई

एईडीओ परीक्षा के एक दिन पूर्व 13 अप्रैल की रात जिला और पुलिस प्रशासन ने परीक्षा केंद्र पर तैनात होने वाले बायोमैट्रिक ऑपरेटर के माध्यम से प्रश्न पत्र लीक करने और ऑनर सीट तय परीक्षार्थियों तक पहुंचा की गुप्त सूचना पर बड़ी कार्रवाई की थी. टीम ने 13 अप्रैल को देर रात छापेमारी कर सॉल्वर गैंग के भगतचौकी निवासी सुजल कुमार, लड़ैयाटांड थाना क्षेत्र के बंगलवा निवाी प्रियांशु कुमार, पटना जिले के विक्रम थाना क्षेत्र के समीर कुमार, भगालपुर जिले के कहलगांव थाना क्षेत्र के ओगरी निवासी प्रशांत कुमार उर्फ पीयूष कुमार को गिरफ्तार किया था. जिसकी निशानदेही पर टीम ने विभिन्न परीक्षा केंद्र से इनके संपर्क में रहकर अनुचित लाभ पाने वाले अभ्यर्थी रौशनी कुमारी, ज्ञानेेंद्र कुमार, सौरभ कुमार, चंदन कुमार, रौशन कुमार, विवेक रावत, गौरव कुमार नितम, सकलदीप दास, कुमारी मधु सहित कुल 18 परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया था. इसको लेकर मुफस्सिल थाना में जिला शिक्षा पदाधिकारी कुणाल गौरव के आवेदन पर मुफस्सिल थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. जिसमें 28 लोगों नामजद किया गया है. जबकि अज्ञात को भी अभियुक्त बनाया गया है. टीम ने सॉल्वर गैंग के पास से स्मार्ट फोन, आईपैड, लैपटॉप, प्रश्नों का उत्तर अंकित करने वाला कुल 19 पुर्जा का एक रोल बरामद किया है, जबकि एक टैब, बायोमैट्रीक ऑपरेटर एंड सुपरर वाइजर लिस्ट की दो प्रतियां, 20 एडमिट कार्ड की प्रति मिली थी. जिसके बाद यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा में आ गयी थी.

मास्टर और कोचिंग संचालक अब भी फरार

सुजल की गिरफ्तारी के बाद यह बात सामने आई की परीक्षा में अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए गैंग ने रणनीति बनाया था. मास्टर नामक व्यक्ति द्वारा मुंगेर सोल्यूसन ग्रुप बनाया गया था. जिसमें मुंगेर के अंबे चौक स्थित एके राठौर कोचिंग संचालक भी शामिल था. गैंग बायोमैट्रिक ऑपरेटर एंड सुपरवाइजर के माध्यम से परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक करने और ऑनर सीट तय परीक्षार्थी को पहुंचा कर अनुचित लाभ पहुंचाने की तैयारी की थी. लेकिन गैंग के चार सदस्य गिरफ्तार हो गये. 14 अप्रैल को इसको लेकर प्राथमिकी दर्ज की गयी थी, लेकिन मुंगेर पुलिस का अनुसंधान धीमा है. अब भी मास्टर नामक व्यक्ति व कोचिंग संचालक पुलिस पकड़ से फरार चल रहा है.

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By RANA GAURI SHAN

RANA GAURI SHAN is a contributor at Prabhat Khabar.

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