मुख्य बातें:
धरहरा (मुंगेर) से सुमन कुमार की रिपोर्ट
Bhavya Portal: बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था को पारदर्शी, डिजिटल और जवाबदेह बनाने की मुहिम को धरहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में बड़ा झटका लगा है. सरकार की अति महत्वाकांक्षी भव्या (BHAVYA) पोर्टल योजना के तहत अस्पताल के एक्सीडेंट एवं इमरजेंसी (आपातकालीन) वार्ड में आने वाले मरीजों के इलाज से लेकर उनके डिस्चार्ज (छुट्टी) होने तक की पल-पल की जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जानी अनिवार्य है. इसके विपरीत, धरहरा सीएचसी में घोर प्रशासनिक लापरवाही के कारण गंभीर मरीजों के डिस्चार्ज की तिथि और सही समय तक रिकॉर्ड नहीं किया जा रहा है, जिससे डिजिटल हेल्थ मिशन कागजों तक सीमित होता दिख रहा है.
मॉनिटरिंग फेल: कंप्यूटर स्क्रीन पर दिख रहा “NA”, मोबाइल नंबर भी गायब
- रोस्टर बेअसर: सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भव्या पोर्टल पर प्रतिदिन के मरीजों की रियल-टाइम एंट्री एवं रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए बाकायदा डेटा ऑपरेटरों का रोस्टर बनाया गया है.
- निगरानी पर सवाल: जिला मुख्यालय स्तर पर इस डिजिटल पोर्टल की दैनिक निगरानी के लिए एक विशेष टेक्निकल टीम भी गठित है. इसके बावजूद धरहरा से बड़ी संख्या में मरीजों का डिस्चार्ज डेटा गायब होना जिला स्तरीय मॉनिटरिंग व्यवस्था की सजगता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.
- अधूरा रिकॉर्ड: अस्पताल के कंप्यूटर स्क्रीन पर उपलब्ध लाइव रिपोर्ट में कई इन-डोर और इमरजेंसी मरीजों के डिस्चार्ज कॉलम में साफ़ तौर पर “NA” (Not Available) दर्ज दिखाई दे रहा है. हद तो यह है कि कई मरीजों का मोबाइल नंबर तक पोर्टल पर अपडेट नहीं है, जिससे उनसे फीडबैक लेना असंभव है. इसके अतिरिक्त कई गंभीर मामलों में डिस्चार्ज डिटेंशन लंबे समय से पेंडिंग (लंबित) चल रहा है.
Bhavya Portal: बेड प्रबंधन में संकट और कानूनी विवाद की आशंका
भव्या पोर्टल पर गलत, भ्रामक अथवा अधूरी जानकारी फीड किए जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि पोर्टल पर लाइव डेटा अपडेट न होने से अस्पताल प्रबंधन को वास्तविक समय में बेड प्रबंधन (Bed Management) करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. इससे नए मरीजों के ऑन-स्पॉट एडमिशन, आपातकालीन रेफरल और विभिन्न स्वास्थ्य बीमा क्लेम (जैसे आयुष्मान भारत योजना) की प्रक्रियाओं में तकनीकी बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दुर्घटना पीड़ितों के मेडिकल-लीगल मामलों (MLC) में सटीक समय का रिकॉर्ड न होना भविष्य में गंभीर प्रशासनिक और कानूनी पेचीदगियों का कारण बन सकता है.
इस घोर लापरवाही के कारण यह पता लगाना पूरी तरह नामुमकिन हो गया है कि कोई मरीज अस्पताल से किस तारीख को डिस्चार्ज हुआ, उसे क्या दवाएं दी गईं और उसकी उपचार प्रक्रिया कब और किस डॉक्टर की देखरेख में पूरी हुई. स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुंगेर के सिविल सर्जन से इस लापरवाही की जांच कराने और दोषी डेटा ऑपरेटरों व प्रबंधकों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है.
