धरहरा प्रखंड के मोहनपुर गांव स्थित कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय शिव महापुराण कथा के छठे दिन शुक्रवार को श्रद्धा और भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला. अयोध्या से पधारे कथाव्यास गरूणेश जी महाराज ने भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय के जन्म तथा उनकी दिव्य लीलाओं का विस्तृत वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. कथाव्यास ने बताया कि तारकासुर नामक राक्षस के अत्याचारों से त्रस्त देवताओं को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय का जन्म हुआ. शिव और पार्वती की दिव्य ऊर्जा से उत्पन्न अग्निपुंज को अग्निदेव ने धारण किया और गंगा में प्रवाहित किया. बाद में सरकंडों के वन में छह बालकों के रूप में कार्तिकेय प्रकट हुए. जिनका पालन-पोषण कृतिकाओं ने किया. माता पार्वती ने सभी को मातृत्व का सम्मान देने हेतु उन्हें षण्मुख (छह मुख) का स्वरूप प्रदान किया. आगे चलकर कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर देवताओं को पुनः उनका स्थान दिलाया. कथा के दौरान गणेश जी के जन्म का प्रसंग भी सुनाया गया. कथावाचक ने बताया कि माता पार्वती ने अपने उबटन से एक बालक की रचना कर उसमें प्राण स्थापित किया और उसे द्वारपाल नियुक्त किया. जब भगवान शिव ने प्रवेश करना चाहा तो गणेश जी ने उन्हें रोक दिया. क्रोधित होकर शिवजी ने उनका सिर काट दिया. बाद में माता पार्वती के शोक को देखकर शिवजी ने हाथी का सिर लगाकर उन्हें पुनर्जीवित किया और ‘गणपति’ तथा ‘प्रथम पूज्य’ होने का वरदान दिया. कथाव्यास ने दोनों भाइयों की प्रसिद्ध ‘ब्रह्मांड परिक्रमा’ कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि जहां कार्तिकेय मयूर पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा करने निकले. वहीं गणेश जी ने माता-पिता की परिक्रमा कर उन्हें ही अपना ब्रह्मांड बताया. उन्होंने कहा कि इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि बुद्धि और श्रद्धा से भी बड़े से बड़ा लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है. मौके पर सुबोध गोस्वामी, ओम कमल, गौरव कुमार, साकेत कुमार, गुड्डू सिंह, कर्मवीर, मोहित, मुन्ना सिंह, जितेंद्र कुमार, बिट्टू कुमार सहित दर्जनों श्रद्धालु मौजूद थे.
गणेश व कार्तिकेय की दिव्य लीला सुन भक्त हुए भाव विभोर
गणेश व कार्तिकेय की दिव्य लीला सुन भक्त हुए भाव विभोर
