मुंगेर से वीरेंद्र कुमार की रिपोर्ट
मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन सड़क परियोजना के निर्माण कार्य पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. घोरघट और गनगनिया के बीच एक जगह पर फोरलेन सड़क में दरार आने से निर्माण एजेंसी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. इतना ही नहीं सड़क किनारे की मिट्टी भी लगातार खिसक रही है, जिससे भविष्य में सड़क की मजबूती और यातायात सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है. मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन मुंगेर को भागलपुर और संथाल परगना क्षेत्र से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है. इस सड़क के चालू होने से आवागमन तेज और सुगम होने की उम्मीद है, लेकिन निर्माण के दौरान ही सड़क में दरार पड़ने की घटना ने परियोजना की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है. स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क के जिस हिस्से में दरार दिखाई दी है, वहां पिछले कुछ दिनों से मिट्टी धंसने और किनारों से खिसने की स्थिति बनी हुई थी. धीरे-धीरे सड़क की सतह पर भी दरार उभर आई. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई गई तो भारी वाहनों के लगातार आवागमन से यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सबग्रेड और एंबैंकमेंट को पर्याप्त मजबूती नहीं मिले तो सड़क की सतह पर इस तरह की दरारें विकसित हो सकती हैं. ऐसे में प्रभावित हिस्से की तकनीकी जांच बेहद जरूरी है.
3792 करोड़ की लागत से बन रही सड़क
3792 करोड़ की लागत से बन रही इस महत्वाकांक्षी फोरलेन परियोजना में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए. लोगों ने मांग की है कि केवल दरार भरने के बजाय पूरे हिस्से की वैज्ञानिक जांच कर दोषी निर्माण प्रक्रिया की पहचान की जाए. साथ ही निर्माण कार्य की नियमित निगरानी कर गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए, ताकि परियोजना लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित साबित हो सके. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एनएचएआई इसकी जांच कराती है या फिर प्रभावित हिस्से की मरम्मत किस गुणवत्ता के साथ पूरी करती है. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई कर सड़क को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाय, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका न रहे.
कहते हैं परियोजना निदेशक
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के परियोजना निदेशक मनीष कुमार ने स्थल का निरीक्षण कर बताया कि जहां सड़क में दरार आई है, उस स्थान का अवलोकन किया गया है. प्रथम दृष्टया अंदरूणी मिट्टी खिसकने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है. निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि प्रभावित हिस्से की पूरी तकनीकी जांच कराई जाए. आवश्यकता पड़ने पर सड़क के उस पूरे पैनल को निकालकर दोबारा मानक के अनुरूप बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा उत्पन्न न हो और सड़क पूरी तरह सुरक्षित रहे.
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