सीनेट के पहले कई स्टेच्यूटरी कमिटी की बैठक एमयू के लिये बनेगी चुनौती

शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर सीनेट बैठक आखिरकार नहीं हो पाया

पे-फिक्सेशन को लेकर अटका एमयू का बजट, सीनेट तैयारियों के नहीं दिख रहे आसार

मुंगेर

सरकार का बजट सत्र 28 फरवरी से आरंभ हो रहा है. जबकि अब वित्तीय वर्ष 2024-25 समाप्त होने में भी मात्र एक माह का समय रह गया है. ऐसे में जहां मुंगेर विश्वविद्यालय का वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पे-फिक्सेशन को लेकर अटका है. वहीं विश्वविद्यालय में सीनेट की तैयारियों के आसार भी नहीं दिख रहे हैं. ऐसे में 6 मार्च को दीक्षांत समारोह के बाद एमयू के लिये सीनेट के साथ इससे पूर्व अपने सभी स्टूच्यूटरी कमिटी की बैठक आयोजित करना बड़ी चुनौती होगी.

बता दें कि नियमानुसार सरकार का बजट सत्र आरंभ होने से पहले ही सभी विश्वविद्यालय को अपना बजट तैयार कर सरकार को देना होता है. इसके लिये ही साल के आरंभ में ही सभी विश्वविद्यालयों में सीनेट बैठक का आयोजन कर अपने बजट का अनुमोदन कराया जाता है, लेकिन एमयू दो सालों से अपने सीनेट बैठक को लेकर पूरी तरह लापरवाह बना है. साल 2023 में जहां शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर सीनेट बैठक आखिरकार नहीं हो पाया. वहीं अब प्रमोशन प्राप्त शिक्षकों के पे-फिक्सेशन के कारण जहां अबतक बजट अधूरा पड़ा है. वहीं विश्वविद्यालय में सीनेट बैठक की तैयारियों का कहीं कोई आसार नहीं दिख रहा है. अब ऐसे में वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक विश्वविद्यालय के बजट का अनुमोदन सीनेट से नहीं होने पर खुद विश्वविद्यालय को पूरे साल वित्तीय परेशानियों से जूझना पड़ेगा.

सीनेट के साथ स्टेच्यूटरी कमिटी की बैठक होगी चुनौती

दीक्षांत समारोह के बाद भले ही एमयू प्रशासन सीनेट की तैयारियों में जुटेगा, लेकिन कम समय में अपने स्टेच्यूटरी कमिटियों की बैठक के साथ सीनेट कराना विश्वविद्यालय के लिये बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि स्टेच्यूटरी कमिटी के निर्णयों को ही सीनेट में रखा जाता है. जिसे सीनेट सदस्य अनुमोदित करते हैं. ऐसे में 6 मार्च के बाद शेष बचे 25 दिनों में विश्वविद्यालय के लिये सिंडिकेट, एकेडमिक काउंसिल, एफिलियेशन कमिटी, फाइनेंस कमिटी, न्यू टिचिंग कमिटी सहित लगभग 6 कमिटियों की बैठक कराते हुये सीनेट बैठक कराना मुश्किल भरा होगा.

बजट के प्रति लापरवाही बढ़ायेगी परेशानी

बता दें कि एमयू और कॉलेजों के पूर्व में पे-रोल मैनेजमेंट पोर्टल पर डाटा अपलोड करने के प्रति लापरवाही के कारण वैसे ही एमयू के शिक्षक व कर्मियों को दिसंबर माह से वेतन नहीं मिला है. जिसे सरकार द्वारा पे-रोल मैनेजमेंट पोर्टल पर डाटा सही से अपलोड नहीं होने के कारण रोक दिया गया है. वहीं अब वित्तीय वर्ष समाप्त होने के पूर्व बजट को लेकर एमयू की लापरवाही खुद विश्वविद्यालय के लिये परेशानी को बढ़ायेगा, क्योंकि समय पर सरकार को बजट नहीं भेजे जाने के बाद विश्वविद्यालय को अपने शिक्षक व कर्मियों के लिये सरकार से वेतनादि मद में राशि मिलने में भी परेशानी होगी.

कहते हैं ओएसडी

कुलपति के ओएसडी डा. प्रियरंजन तिवारी ने बताया कि बजट तैयार किया जा रहा है. बजट तैयार होने के बाद सीनेट की तैयारी आरंभ कर दी जायेगी,

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By Prabhat Khabar News Desk

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