तीन वर्षों में 32 लाख पौधा लगाने का दावा, जमीन पर नहीं दिख रहा असर

ग्रामीण क्षेत्र के लोग बताते हैं कि कई स्थानों पर पौधारोपण तो हुआ, लेकिन देखरेख के अभाव में अधिकांश पौधे सूख गए

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष

– वन विभाग, जीविका, मनरेगा, कृषि वानिकी, व एनजीओ ने लगाए पौधे, अब अस्तित्व पर उठ रहे सवाल

मुंगेर

पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से पिछले तीन वित्तीय वर्षों में मुंगेर जिले में 32 लाख 13 हजार 70 पौधारोपण किए गये. सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 से लेकर 2025-26 तक विभिन्न विभागों और संस्थाओं ने बड़े पैमाने पर पौधे लगाए, लेकिन जिले में इन पौधों की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं. आम लोगों का कहना है कि वन क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए तो इतनी बड़ी संख्या में लगाए गए पौधे कहीं दिखाई नहीं देते.

पौधों की निगरानी में करोड़ों हो गये खर्च

आंकड़ों के मुताबिक केवल वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही 11 लाख 35 हजार 345 पौधारोपण किया गया. वहीं तीन वर्षों में वन विभाग ने 7 लाख 9 हजार 500 पौधे लगाए. कृषि वानिकी के तहत 3 लाख 76 हजार 287, आईटीसी एवं विभिन्न गैर सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) ने 15 लाख 53 हजार 903 तथा जीविका समूहों द्वारा 5 लाख 73 हजार 380 पौधारोपण किए जाने का दावा किया गया है. इसके अलावा जल-जीवन-हरियाली अभियान के अंतर्गत मनरेगा के माध्यम से भी 10 लाख से अधिक पौधे लगाने की बात कही जा रही है. इतना ही पौधों की निगरानी पर भी करोड़ों खर्च की बात कही जा रही है. इस तरह सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से जिले में हरियाली बढ़ाने की बड़ी तस्वीर पेश की जा रही है, लेकिन हकीकत कुछ ओर ही बयां बन रही है.

दावों की पोल खोल रही पौधों की मौजूदगी

मुंगेर जिले का कुल क्षेत्रफल करीब 1420 वर्ग किलोमीटर है. यदि सरकारी आंकड़ों पर भरोसा किया जाए तो जिले के गांवों, सड़कों के किनारे, सरकारी परिसरों, स्कूल-कॉलेजों, आहर-पोखरों और सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी संख्या में पौधे दिखाई देने चाहिए थे. लेकिन हकीकत इससे अलग नजर आती है. ग्रामीण क्षेत्र के लोग बताते हैं कि कई स्थानों पर पौधारोपण तो हुआ, लेकिन देखरेख के अभाव में अधिकांश पौधे सूख गए. कहीं पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड नहीं लगाए गए तो कहीं सिंचाई और संरक्षण की व्यवस्था नहीं हो सकी. पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि पौधारोपण की सफलता केवल गड्ढा खोदकर पौधा लगाने से नहीं, बल्कि उसके जीवित रहने की दर (सर्वाइवल रेट) से तय होती है. यदि लगाए गए पौधों का नियमित ऑडिट और भौतिक सत्यापन हो तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है. पर्यावरण प्रेमियों ने बताया कि अगर पौधा रोपण की हकीकत देखनी है तो समाहरणालय के सामने शहीद एसपी केसी सुरेंद्र बाबू पार्क को देखा जा सकता है. जहां हर वर्ष विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी संगठन द्वारा 100 से अधिक पौधे पूरे ताम-झाम के साथ लगाये जाते है. लेकिन वर्तमान समय में वहां नाम मात्र का ही पौधा दिखाई दे रहा है. अगर देख-रेख होती है, यह पार्क हरित आवरण के अधीन होता.

कहते हैं डीएफओ

वन प्रमंडल पदाधिकारी अम्बरीष कुमार मल्ल ने बताया कि भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य में सघन वन क्षेत्र में वृद्धि हुई है. खुले वन क्षेत्र में पौधों की संख्या में काफी बढोतरी हुई. पौधारोपण, वन संरक्षण अभियान और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से हरित क्षेत्र में लगातार सुधार हो रहा है.

तीन वित्तीय वर्ष में किसने कितना लगाया पौधा

वित्तीय वर्ष कृषि वानिकी आईटी-एनजीओ जीविका वन विभाग

2023-24 123123 500000 187722 324500

2024-25 148788 507496 153515 220000

2025-26 101376 546407 232143 165000

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