80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मुंगेर का सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ मां चंडिका स्थान पूरी तरह भक्ति और देशभक्ति के अनूठे रंग में सराबोर नजर आया. जहां सामान्य दिनों में भक्त मां चंडिका के नेत्र स्वरूप का दर्शन-पूजन कर आध्यात्मिक शांति प्राप्त करते हैं, वहीं राष्ट्रीय पर्व पर मंदिर का गर्भगृह राष्ट्रप्रेम की भावना से ओत-प्रोत दिखा. स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में मंदिर के मुख्य गर्भगृह और मां के पावन विग्रह को भव्य व आकर्षक तरीके से तिरंगे के रंगों और राष्ट्रीय ध्वज से सजाया गया, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा.
फूलों और तिरंगे से हुआ मां के नेत्र स्वरूप का अलौकिक श्रृंगार
मां के दरबार में स्वतंत्रता दिवस को ऐतिहासिक बनाने के लिए विशेष सजावट की गई:
- तिरंगा थीम पर श्रृंगार: मां चंडिका के पावन स्वरूप के चारों ओर केसरिया, सफेद और हरे रंग के सुगंधित फूलों की रंग-बिरंगी मालाओं के साथ छोटे-छोटे तिरंगे झंडे सजाए गए.
- दीयों की रोशनी और राष्ट्रीय ध्वज: गर्भगृह की दीवारों, वेदी और पूजा स्थल के आसपास करीने से लगाए गए राष्ट्रीय ध्वज और प्रज्वलित दीपकों की आभा के बीच मां के नेत्र दर्शन कर श्रद्धालु अभिभूत हो उठे.
आस्था और देशभक्ति के संगम से भावुक हुए श्रद्धालु
मां के दरबार में पहुंचे भक्तों के लिए यह दृश्य अत्यंत प्रेरणादायी और भावुक कर देने वाला रहा:
- राष्ट्रप्रेम भी एक साधना: दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने कहा कि सनातन संस्कृति में मां की आराधना और राष्ट्र की वंदना दोनों ही सर्वोच्च स्थान रखती हैं. एक तरफ शक्ति स्वरूपा मां चंडिका के प्रति अटूट आस्था है, तो दूसरी तरफ तिरंगा देश की आन, बान और शान का प्रतीक है.
- सांस्कृतिक समरसता की मिसाल: गर्भगृह में श्रद्धा से झुके शीश और सामने लहराते तिरंगे ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि मुंगेर की माटी में धर्म, परंपरा और राष्ट्रप्रेम आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं.
'देश सर्वोपरि' का दिया पावन संदेश
शक्तिपीठ चंडिका स्थान में स्वतंत्रता दिवस पर सजा यह विहंगम दृश्य आस्था और राष्ट्रप्रेम को एक सूत्र में पिरोने का जीवंत उदाहरण बना. मंदिर परिसर से श्रद्धालुओं ने 'देश सर्वोपरि है' के संकल्प के साथ राष्ट्र की सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की.
