बरियारपुर प्रखंड में बाढ़ का कहर, गांव से सड़क तक पानी ही पानी : खुले आसमान के नीचे भरवाए जा रहे इंटर के फॉर्म

बरियारपुर प्रखंड बाढ़ की विकराल चपेट में है, जिससे जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. गांवों में पानी भरने से बड़ी आबादी सड़क और रेलवे पटरी पर शरण लेने को मजबूर है. राहत स्थलों पर शौचालय और टेंट जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

बरियारपुर : पूरा बरियारपुर प्रखंड बाढ़ की गिरफ्त में आ चुका है. गांवों में पानी फैलने के बाद बड़ी आबादी सड़क और रेलवे पटरी के किनारे शरण लेकर किसी तरह दिन काट रही है. बाढ़ प्रभावित परिवारों की परेशानी इस बात से और बढ़ गयी है कि राहत स्थलों पर अस्थायी शौचालय और पॉलिथीन टेंट जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है. कई परिवार खुले में रहने को मजबूर हैं.

विद्यालय के बाहर फ़ॉर्म भरती छात्राएं

स्कूलों में घुसा पानी, खुले आसमान के नीचे भरवाया जा रहा फॉर्म

बरियारपुर प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय से लेकर उच्च विद्यालय तक बाढ़ की चपेट में हैं. अधिकांश स्कूलों में पानी प्रवेश कर जाने से पठन-पाठन प्रभावित है. इसके बावजूद इंटर फाइनल परीक्षा के लिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया जारी है.

12 सितंबर अंतिम तिथि होने के कारण छात्र बाढ़ का पानी पार कर विद्यालय पहुंच रहे हैं. स्कूल परिसर में पानी जमा होने के कारण प्रधानाध्यापक खुले आसमान के नीचे टेबल लगाकर छात्रों का फॉर्म भरवा रहे हैं. वहीं शिक्षक-शिक्षिकाएं सड़क किनारे खड़े होकर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए फॉर्म भरने की अंतिम तिथि बढ़ायी जानी चाहिए. नाव या गहरे पानी के बीच से होकर विद्यालय पहुंचना छात्रों के लिए जोखिम भरा है.

बाढ़ की जमीनी तस्वीर में ये परेशानी सबसे बड़ी

  • बड़ी आबादी सड़क और रेलवे पटरी किनारे शरण लेने को मजबूर.
  • राहत स्थलों पर अस्थायी शौचालय की व्यवस्था नहीं.
  • कई परिवारों को पॉलिथीन उपलब्ध नहीं होने का आरोप.
  • स्कूलों में पानी घुसने से पठन-पाठन प्रभावित.
  • बाढ़ के बीच छात्र विद्यालय पहुंचकर भर रहे इंटर परीक्षा के फॉर्म.
  • मवेशियों के साथ एनएच-80 के किनारे डेरा डाल रहे पशुपालक.
सड़क पर रह रहे बाढ़ से प्रभावित लोग

एनएच-80 के किनारे मवेशियों के साथ डेरा

गांवों में पानी फैलने से पशुपालकों की मुश्किलें भी बढ़ गयी हैं. मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए बड़ी संख्या में पशुपालक मुख्य सड़क मार्ग के किनारे पहुंच गये हैं. एनएच-80 के दोनों किनारों पर मवेशियों की कतार दिखाई दे रही है.

पशुपालक पॉलिथीन से अस्थायी टेंट बनाकर परिवार और मवेशियों के साथ रहने को मजबूर हैं. प्रभावित लोगों का कहना है कि सरकारी स्तर पर यहां न तो अस्थायी शौचालय बनाया गया है और न ही पॉलिथीन उपलब्ध कराया गया है.

बाढ़ से प्रभावित सड़क, विद्यालय एवं अन्य | Prabhat Khabar Network

तीन जगह सामुदायिक रसोई, फिलिप स्कूल के पास स्वास्थ्य शिविर

समाचार लिखे जाने तक बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए तीन स्थानों पर सामुदायिक रसोई संचालित होने की जानकारी है. मुरला मुसहरी के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए खड़िया गांव में, कल्याण टोला पंचायत के लिए बरियारपुर उत्तरी पंचायत भवन में और गंगा पार हरिणमार पंचायत में सामुदायिक रसोई चल रही है.

वहीं फिलिप उच्च विद्यालय के समीप अस्थायी बाढ़ स्वास्थ्य शिविर भी संचालित किया जा रहा है.

राहत व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल

बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि बाढ़ से पहले प्रशासनिक स्तर पर की जाने वाली तैयारियां धरातल पर पर्याप्त नजर नहीं आ रही हैं. सुरक्षित रहने की जगह, अस्थायी शौचालय और पॉलिथीन जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से प्रभावित परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

बाढ़ के बीच जहां लोगों के सामने घर और सामान बचाने की चुनौती है, वहीं छात्रों के लिए परीक्षा फॉर्म भरना और पशुपालकों के लिए मवेशियों को सुरक्षित रखना भी मुश्किल हो गया है.

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लेखक के बारे में

By संजीव कुमार

संजीव कुमार प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बरियारपुर (भागलपुर) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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