मुंगेर, बरियारपुर. गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि के साथ बरियारपुर प्रखंड के कई गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क भंग हो गया है. कई गांव बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं और लोगों के घरों में पानी प्रवेश करने के बाद परिवारों ने ऊंचे स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है. बाढ़ पीड़ित सड़क और रेलवे लाइन किनारे अस्थायी आशियाना बनाकर रहने को मजबूर हैं. एक ओर नीचे से गंगा का बढ़ता पानी और दूसरी ओर आसमान से हो रही बारिश ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.
कालाटोला, एकाशी और रहिया समेत कई गांव पानी से घिरे
बरियारपुर के कालाटोला, एकाशी, रहिया और मुरला मुसहरी समेत कई गांवों का मुख्य सड़क मार्ग से संपर्क भंग हो चुका है. इन गांवों के चारों ओर पानी ही पानी नजर आ रहा है. ग्रामीणों को किसी तरह जुगाड़ कर मुख्य मार्ग तक पहुंचना पड़ रहा है. कई स्थानों पर नाव की व्यवस्था की गयी है, लेकिन कुछ इलाकों में नाव उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीणों को जोखिम उठाकर पानी पार करना पड़ रहा है.
मुरला मुसहरी के 60 परिवारों ने छोड़ा गांव
मुरला मुसहरी गांव की स्थिति अधिक गंभीर बतायी जा रही है. मुख्य संपर्क पथ तक पहुंचने के रास्ते में काफी गहरा बाढ़ का पानी है. ग्रामीण जुगाड़ के सहारे किसी तरह मुख्य सड़क तक पहुंच रहे हैं. गांव के करीब 60 परिवार अपने घरों को छोड़कर खड़िया पीपरा रोड पर परिवार के साथ रहने को मजबूर हैं.
लालजी टोला और कालाटोला से भी पलायन
लालजी टोला के लोग भी बाढ़ के कारण अपने घरों को छोड़कर रेलवे लाइन के किनारे अथवा ऊंचे सड़क वाले स्थानों पर चले गये हैं. वहीं कालाटोला गांव के लोग नाव के सहारे अपने घरों का सामान और मवेशियों को लेकर ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं. रहिया टोला की स्थिति भी बाढ़ के कारण भयावह हो गयी है.
सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे गुजर रहा परिवारों का समय
बाढ़ से प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने परिवार का भरण-पोषण और सुरक्षित रहने की है. कई लोग सड़क या रेलवे लाइन किनारे खुले स्थानों पर आशियाना बनाकर रहने को मजबूर हैं. लगातार बारिश के कारण इन अस्थायी ठिकानों पर रहना भी मुश्किल हो रहा है. ग्रामीणों के अनुसार अब तक सरकारी स्तर पर पॉलिथीन का वितरण भी नहीं किया गया है.
नाव की व्यवस्था नहीं होने से बढ़ रहा दुर्घटना का खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ स्थानों पर नाव की व्यवस्था है, लेकिन सभी प्रभावित गांवों और संपर्क मार्गों पर नाव उपलब्ध नहीं है. ऐसे में लोग अपनी जुगाड़ से गहरे पानी को पार कर मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इस दौरान कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में पर्याप्त नाव उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है.
बाढ़ पीड़ितों के लिए सामुदायिक रसोई भी नहीं
बाढ़ से प्रभावित परिवारों की परेशानी के बीच राहत व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ पीड़ितों के लिए कहीं भी सामुदायिक रसोई संचालित नहीं की जा रही है. इससे विस्थापित परिवारों के सामने भोजन की व्यवस्था करना भी चुनौती बन गया है. लोगों ने प्रशासन से पॉलिथीन, नाव, भोजन और अन्य जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है.