सदर अस्पताल. इमरजेंसी वार्ड में अव्यवस्था का आलम
एक ओर जहां स्वास्थ्य विभाग मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहा है़ वहीं दूसरी ओर मुंगेर सदर अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड में रोगियों को बेड पर चादर तक उपलब्ध नहीं कराया जाता. यदि कोई अपने घर से चादर लेकर अस्पताल पहुंचता है तो खुद का चादर बेड पर बिछाता है. अन्यथा खुले बेड पर ही इलाज होता है.
मुंगेर : सरकारी अस्पताल में इलाज कराने आने वाले रोगियों के लिए सरकार ने सतरंगी चादर योजना लागू कर रखी है. इसके तहत प्रत्येक दिन अलग-अलग रंग की चादर रोगियों को बेड पर उपलब्ध करायी जानी है, लेकिन प्रमंडलीय मुख्यालय मुंगेर स्थित सदर अस्पताल में यह योजना कागज पर ही चल रहा है. वार्ड में दो-तीन दिनों में तो चादर बदल भी दिये जाते. लेकिन इमरजेंसी वार्ड में पहुंचने वाले रोगियों को खुले बेड पर ही रखा जाता है, जो बीमार रोगियों के लिए एक बड़ा खतरा है, क्योंकि खुले बेड पर कई तरह के रोगी आते रहते हैं और उनका संक्रमण एक दूसरे को हस्तांतरित भी होता रहता है.
वाटर प्यूरीफायर बनी है शोभा की वस्तु
कहने को तो अस्पताल प्रबंधन ने इमरजेंसी वार्ड में काफी महंगी वाटर प्यूरीफायर मशीन लगायी गयी है, पर दो माह से यह शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है़ खराब पड़े इस वाटर प्यूरीफायर को ठीक करवाने की दिशा में अस्पताल प्रबंधन पूरी तरह उदासीन है़ इसके कारण मरीजों को बाहर से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है़ बदहाली यह है कि सरकारी राशि से यहां दो एयर कंडीशनर भी लगाये गये हैं जो खराब और बंद हैं. इससे इस तपिश में भी यहां आने वाले रोगियों को इसका लाभ नहीं मिलता है.
एक ही बेड पर दो मरीज का इलाज
इमरजेंसी वार्ड के कक्ष संख्या दो में एक ही बेड पर दो मरीज का इलाज चल रहा था़ सीताकुंड हसनपुर निवासी श्रवण मंडल की पत्नी खुशबू देवी तथा चिरैयाबाद निवासी राजेश मंडल की पत्नी साबो देवी ने बताया कि एक बेड पर दो मरीज को देने के कारण उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ा़
शहर के नीलम चौक निवासी मो इदरिश की पत्नी तारा बेगम व बेगूसराय निवासी कृष्ण महतो ने बताया कि सदर अस्पताल में उसकी कोई पहुंच पैरवी नहीं है, शायद इसी कारण उन्हें इलाज के दौरान मांगे जाने पर भी बेड पर चादर उपलब्ध नहीं कराया गया़ खुले बेड पर ही रोगी का इलाज हो रहा है.
