चिंताजनक
टमाटर तोड़ने की भी नहीं मिल रहे किसानों को मजदूरी
खुदरा बेचनेवालों को हो जाता है भरपूर फायदा
मुंगेर : एक ओर जहां जिले के किसान चार रुपये किलो टमाटर बेचने को विवश है, वहीं टमाटर बाजार में 10-12 रुपये यानी तीन गुणा भाव पर बिक रहा है. ऐसे में यह कहा जा सकता है कि किसान व सब्जी विक्रेताओं के बीच बिचौलिये मालामाल हो रहे हैं और किसान बेहाल. जिसे अपनी पूंजी लौटानी भी काफी मुश्किल हो गयी है़
कम परेशानी में अधिक मुनाफा
सब्जी दुकानदार मुकेश कुमार ने बताया कि यहां पर वे थोक रेट में चार-पांच रुपये किलो खरीदे हैं मंडी से लाकर बेचते- बेचते 50 फीसदी टमाटर खराब हो जाता है़ इस कारण उन्हें 10- 12 रुपये किलो के दर से बेचना पड़ जाता है़ दुकानदार के बात पर यदि गौर किया जाये तो उन्हें काफी कम परेशानी में काफी अधिक मुनाफा हो जाता है़ जहां तक टमाटर खराब होने की बात है, वह तब होगा जब वह अधिक दिनों तक नहीं बिक पायेगा़ किंतु अधिकांश दुकानदार एक से दो दिनों में अपना माल बेच लेते हैं. इस कारण उसे कम लागत और कम परेशानी में ही अधिक मुनाफा मिल जाता है़
सदर प्रखंड के गढ़ीरामपुर गांव के किसान शंकर सिंह, कुंदन कुमार, अरबिंद झा, त्रिवेणी साव सहित अन्य ने बताया कि दिन भर खेत में मेहनत कर टमाटर को तोड़ना पड़ता है़ जिसके बाद उसे चुन कर तथा बेहतर तरीके से संजो कर मंडी में पहुंचाना पड़ता है़ जिसके लिए एक टोकरी टमाटर पर पचास रुपये का खर्च गिरता है़ वहीं मंडी पहुंचते ही उसका भाव चार रुपये लगा दिया जाता है, जिस पर गद्दीदार कमीशन, तहरीर तथा कई खर्च जोड़ देते हैं. जोड़ने पर पता चलता है कि चार के जगह उन्हें तीन रुपये ही प्राप्त हुए़ जबकि वहीं टमाटर बाजार में 10- 12 रुपये के दर बिक रहा होता है़ ऐसे में फस्ल की पूंजी लौटना तो दूर मजदूरी पर भी आफत हो गयी है़ यही हाल चड़ौन, रामदिरी, महमदा, नौवागढ़ी सहित अन्य गांव के किसानों का भी है़
