लापरवाही. लोगों की आंखों को रोशनी देने में सदर अस्पताल फिसड्डी
सदर अस्पताल मोतियाबिंद के ऑपरेशन लक्ष्य से कोसों दूर है. जिले में निजी अस्पतालों तथा एनजीओ के भरोसे ही अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम चलाया जा रहा है. गरीबों के लिए यह काफी खर्चीला होता है. इस अोर ध्यान दिये जाने की जरूरत है.
मुंगेर : जिले में अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम लक्ष्य से कोसों दूर है़ चालू वित्तीय वर्ष का 9 माह बीत चुका है़ किंतु अबतक मात्र 34.45 प्रतिशत ही मोतियाबिंद का ऑपरेशन हो पाया है़ जिनमें सदर अस्पताल के चक्षु विभाग पूरी तरह बदतर स्थिति में है. यहां लक्ष्य के अनुरूप मात्र 0.68 प्रतिशत उपलब्धि है, जबकि जिले के लिए निर्धारित लक्ष्य का कम से कम 28.57 प्रतिशत हिस्से का ऑपरेशन हर साल सदर अस्पताल में पदस्थापित चिकित्सकों को करना है़ किंतु जमीनी हकीकत यह है कि अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम में सदर अस्पताल इस बार पूरी तरह फिसड्डी साबित हो रही. निजी अस्पतालों और एनजीओ के भरोसे ही जिले में अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम चल रहा.
9 माह में सिर्फ 24 ऑपरेशन: सदर अस्पताल के खराब प्रदर्शन के कारण जिले में अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम को ग्रहण लगता जा रहा है़ चालू वित्तीय वर्ष के 9 माह बीतने के बावजूद अबतक यहां सिर्फ 24 मरीजों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जा सका है़ मालूम हो कि सदर अस्पताल में दो नेत्र विशेषज्ञ चिकित्सक पदस्थापित हैं. स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूर्व से यह निर्धारित है कि एक चिकित्सक को एक वर्ष में कम से कम 500 मरीजों के आंखों का ऑपरेशन करना है़ इस अनुसार दोनों चिकित्सक को मिल कर एक साल में कम से कम 1000 मरीजों के आंख का ऑपरेशन करना है़ किंतु 9 महीने में दोनों चिकित्सक मिल कर 100 के आंकड़े को छूना तो दूर अर्धशतक भी नहीं लगा पाये हैं जो सरकारी चिकित्सा व्यवस्था की दुर्दशा व उदासीनता की पोल खोल रही.
निजी अस्पतालों के कंधे पर अॉपरेशन का भार
जिले में अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम अब पूरी तरह बीमार चल रहा है, जिसे कारगर इलाज की जरूरत है़ मालूम हो कि जिले को चालू वित्तीय वर्ष में कुल 3500 मरीजों के मोतियाबिंद ऑपरेशन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है़ जिसमें से दिसंबर माह तक कुल 1206 मरीजों का ऑपरेशन किया जा सका है़ लेकिन उनमें से 983 ऑपरेशन निजी अस्पतालों द्वारा किया गया है, जिसके लिए मरीजों को पूरे खर्चे का वहन करना पड़ रहा. वहीं 199 ऑपरेशन एनजीओ द्वारा किया गया है. जिला अंधापन नियंत्रण समिति द्वारा ऑपरेशन के बाद प्रति मरीज के दर से एक हजार रुपये की राशि का भुगतान संबंधित निजी अस्पताल व एनजीओ को करना पड़ता है़ जबकि सदर अस्पताल में ऑपरेशन होने पर न तो मरीजों को कोई खर्च लगता है और न ही किसी एनजीओ के कार्यालय का चक्कर ही लगाना पड़ता है़ किंतु सदर अस्पताल में सारी सुविधाएं रहने के बावजूद भी यह कार्यक्रम निजी अस्पतालों व एनजीओं के हवाले हो चुका है़
दिसंबर तक मोतियाबिंद ऑपरेशन के आंकड़े
संस्थान ऑपरेशन की संख्या
सदर अस्पताल 24
निजी अस्पताल 983
रहमानी फाउंडेशन 199
मुंगेर चक्षुदान यज्ञ समिति 0
लायंस क्लब मुंगेर 0
असरगंज चक्षुदान यज्ञ समिति 0
