शहादत के 12 वर्ष बाद भी दोषियों को नहीं मिली सजा

एसपी केसी सुरेंद्र बाबू की शहादत पर विशेष मुंगेर : मुंगेर के एसपी केसी सुरेंद्र बाबू की शहादत के 12 वर्ष हो गये. लंबे अनुसंसाधन एवं कानूनी प्रक्रिया के बावजूद अब तक पुलिस प्रशासन अपने एसपी के हत्यारों को सजा नहीं दिला सका है. अलबत्ता कई आरोपी साक्ष्य के अभाव में रिहा हो गये और […]

एसपी केसी सुरेंद्र बाबू की शहादत पर विशेष

मुंगेर : मुंगेर के एसपी केसी सुरेंद्र बाबू की शहादत के 12 वर्ष हो गये. लंबे अनुसंसाधन एवं कानूनी प्रक्रिया के बावजूद अब तक पुलिस प्रशासन अपने एसपी के हत्यारों को सजा नहीं दिला सका है. अलबत्ता कई आरोपी साक्ष्य के अभाव में रिहा हो गये और जो मामले न्यायालय में लंबित है उसमें गवाह उपस्थित नहीं हो रहे. बदहाली यह है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2011 में इस महत्वपूर्ण कांड को री-ओपेन करते हुए पुन: अनुसंधान की प्रक्रिया प्रारंभ कराया. लेकिन अनुसंधान फाइलों में ही दम तोड़ रही है.
5 जनवरी 2005 को हुई थी शहादत : 5 जनवरी 2005 मुंगेर के इतिहास एक काला अध्याय जोड़ गया. तत्कालीन पुलिस अधीक्षक केसी सुरेंद्र बाबू की भीमबांध की लौटते समय माओवादियों द्वारा किये गये बारूदी सुरंग विस्फोट में शहीद हो गये. वे भीमबांध के पैसरा गांव में नक्सलियों के विरुद्ध छापामारी करने गये थे. इस घटना में एसपी सहित उनकी जिप्सी पर सवार छह पुलिसकर्मियों की मौत हो गयी थी. मृतकों में जिप्सी चालक मो इस्लाम, अंगरक्षक ओमप्रकाश गुप्ता, मो अब्दुल कलाम, शिव कुमार राम एवं ध्रुव कुमार ठाकुर शामिल थे.
न्यायालय में चल रहे दो मामले : एसपी हत्याकांड के संदर्भ में मुंगेर न्यायालय में दो मामले चल रहे हैं. एक मामला मुंगेर के जिला सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में सत्रवाद संख्या 584/09 चल रहा है. जबकि दूसरा अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय के न्यायालय में सत्रवाद संख्या 614/12 लंबित है. सत्रवाद संख्या 584/09 में अबतक आरोपियों के विरुद्ध आरोप गठन नहीं हो पाया है. जिसमें दासो यादव व बचनदेव यादव को मुंगेर न्यायालय में उपस्थापित करना है जो खैरा थाना कांड संख्या 140/04 में जमुई जेल में बंद है.
पांच जनवरी 2005 को बारूदी सुरंग विस्फोट में हुए थे शहीद
आरोपित हो चुके हैं रिहा
एसपी हत्याकांड का मूल केस सत्रवाद संख्या 429/06 एवं सत्रवाद संख्या 329/07 का निष्पादन हो चुका है. इस मामले में पुलिस ने अपने अनुसंधान में जमुई जिले के सोनो थाना अंतर्गत बिच्छागढ़ निवासी भोपाल ठाकुर व मंगल राय के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया था. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इन आरोपियों ने हत्याकांड में अपनी संलिप्तता भी स्वीकारी थी. लेकिन जब मामले की सुनवाई हुई तो गवाहों ने न्यायालय में अभियुक्त की पहचान नहीं की. फलत: साक्ष्य के आरोप में ये लोग रिहा हो गये. दूसरे मामले में भी खड़गपुर के प्रसंडो निवासी राजकुमार दास के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया था और वह भी न्यायालय द्वारा निष्पादित हो चुका है.
वर्ष 2011 में रीओपेन हुआ मामला
केसी सुरेंद्र बाबू हत्याकांड में लगातार आरोपियों की रिहाई के बाद जब पुलिस मुख्यालय ने मामले की समीक्षा की तो उसमें कई स्तर पर खामियां पायी गयी. यहां तक कि घटना के समय जो पुलिस अधिकारी व पुलिसकर्मी मौजूद थे उनकी भी गवाही न्यायालय में नहीं हुई थी. फलत: आरोपियों को लाभ मिलता गया और वे लोग छूटते गये. न्यायालय में कांड की पुन: सुनवाई की गुहार लगाते हुए यह कहा गया था कि तारापुर के तत्कालीन अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सनत कुमार श्रीवास्तव, अवर निरीक्षक रामानंद सिंह, आरक्षी कृष्णानंद यादव, मार्शल टोकनो, भृगु सोरेन का बयान इस कांड में दर्ज होना आवश्यक है. क्योंकि ये लोग घटना के समय मौजूद थे और कांड के संदर्भ में जानकारी रखते हैं. बावजूद अबतक भी कई गवाहों का बयान न्यायालय में दर्ज नहीं हो पाया है.
कहते हैं पुलिस पदाधिकारी
खड़गपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुरेन्द्र प्रसाद सिंह का कहना है कि एसपी हत्याकांड 04/2005 में 22 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गयी थी. इसमें कई आरोपी साक्ष्य के अभाव में रिहा हो चुके हैं. वहीं आठ लोगों की जांच अब तक पूरी नहीं हो पायी है. जबकि इनमें से एक चिराग दा मारा जा चुका है. न्यायालय में कांड की क्या स्थिति उन्हें यह पता नहीं.

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