मुंगेर : एक ओर जहां स्वास्थ्य विभाग सुरक्षित प्रसव का दावा करती है, वहीं यह दावा खोखला साबित हो रहा. अस्पताल के प्रसव केंद्र में न तो समय पर चिकित्सक मौजूद रहते हैं और न ही मरीजों को बेहतर सुविधाएं ही उपलब्ध होती है़ चिकित्सक के गैर मौजूदगी में नर्स के भरोसे ही प्रसव कार्य होता है़ जिसके कारण जच्चे व बच्चे की जान हमेशा खतरे में रहती है़ रविवार को शाम चार बजे प्रसव केंद्र में चिकित्सक की कुर्सी खाली पड़ी हुई थी़
बगल की कुर्सी पर मौजूद नर्स बुलबुल कुमारी ने बताया कि दो बजे दिन में डॉ आसीम कुमार आये थे़ कुछ देर पहले वे यहां से निकले हैं. तभी दूसरी नर्स संगीता कुमारी ने बताया कि डॉक्टर साहब शायद इमरजेंसी वार्ड में होंगे़ किंतु इमरजेंसी वार्ड में उस समय डॉ के रंजन ड्यूटी पर मौजूद थे़ वहां भी डॉ आसीम कुमार नहीं थे़ अस्पताल प्रबंधन तथा चिकित्सकों की लापरवाही के कारण लगातार नवजातों की जाने जा रही है़ स्वास्थ्य विभाग द्वारा किये जा रहे सुरक्षित प्रसव के बड़े- बड़े दावे यहां के प्रसव केंद्र में लगातार तार- तार हो रहे हैं. बावजूद अस्पताल प्रबंधन इसे गंभीरता से नहीं ले रही है़
विदित हो कि पिछले 30 सितंबर को भी यहां चिकित्सक के मौजूद नहीं रहने के कारण एक शिशु की मौत प्रसूता के गर्भ में ही हो गयी थी़ इसके बाद भी प्रसव केंद्र में चिकित्सकों की लापरवाही जस की तस बनी हुई है़
