मुंगेर : ज विश्व जनसंख्या दिवस पर चंद बुद्धिजीवी एवं छात्राओं के विचार चिंतनीय है. साहित्यकार मधुसूदन आत्मीय ने कहा कि अनियंत्रित जनसंख्या तथा कालाधन भारत जैसे बड़े देशों की सर्वप्रमुख समस्या है. जहां बेतहाशा बढ़ती आबादी का दुष्पभ्राव सबसे ज्यादा पर्यावरण व पेयजल पर पड़ रहा है. वहीं भारत का खरबों रुपया विदेशी बैंकों में रहने के कारण विकास के लिए कर्ज लेना मजबूरी बन गयी है. शिक्षक सह मध्य विद्यालय के समन्वयक एहतेशाम आलम ने कहा कि विश्व की जनसंख्या यदि नियंत्रित रहे तो बेरोजगारी, गरीबी तेजी से नहीं बढ़ पायेगी.
छात्रा अफरीन परवीन ने कहा कि इस देश के पढ़े-लिखे मुसलमान जागरूक हो गये हैं जो अपने बच्चों को ठेला व टोकड़ी पकड़ाने की बजाय परिवार छोटा रखना पसंद करते हैं. स्नातक की छात्रा मरियम बानो ने कहा कि तेजी से बढ़ रही आबादी को रहने की जगह दुनिया में कम पड़ती जा रही है. जो तनाव व कलह का मुख्य कारण है. रफिया परवीन ने कहा कि भारत जैसे अधिक आबादी वाले देश में बढ़ते शहरी करण से हरियाली घट रही है. जो पर्यावरण के लिए घातक सिद्ध हो रहा है. इनके अलावा अरविंद पासवान तथा जेवा परवीन ने भी इस समस्या पर अपनी विचार व्यक्त किये.
