मुंगेर: पोलो मैदान में आयोजित दो दिवसीय कृषि यांत्रिकरण मेला में किसानों को अनुदान का उचित लाभ नहीं मिल रहा है. हालांकि बाजार से खरीदने के बजाय मेले में किसानों को थोड़ी बहुत राहत जरूर मिल रही है. सरकार की योजना यह है कि किसान अनुदानित मूल्य पर कृषि यंत्र खरीद कर आधुनिक तरीके से खेती करें.
किंतु कृषि मेला के नाम पर सरकार द्वारा जो अनुदान निर्धारित किया गया है उसमें विभागीय उदासीनता के कारण किसानों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है. जो कृषि यंत्र बाजार में 15 हजार रुपये की कीमत पर उपलब्ध है उसी यंत्र का कृषि मेला में 20 हजार रुपये मूल्य रखा गया है. जिसके कारण मूल्य के अनुसार निर्धारित अनुदान से किसानों को उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है.
कहते हैं पदाधिकारी : जिला कृषि पदाधिकारी कृष्ण कुमार वर्मा ने कहा कि यह सही है कि कई कृषि यंत्रों का मूल्य बाजार से अधिक है. लेकिन इसका मूल कारण यह है कि बाजार में विक्रेता वैट की चोरी कर कृषि यंत्रों को कम मूल्य पर बेचते हैं. जबकि मेले में इसकी चोरी नहीं हो पाती. उन्होंने कहा कि मेले में मिलने वाले सभी यंत्रों की विक्रेताओं द्वारा गारंटी दी जाती है.
मेले के समानों की नहीं रहती गारंटी
हवेली खड़गपुर प्रखंड निवासी किसान केशो यादव का कहना है कि कृषि मेले में खरीदे गये कृषि यंत्रों का कोई गारंटी नहीं रहता है. जबकि बाजार से यंत्र खरीदने पर उसकी गारंटी भी दी जाती है. कृषि मेले में कुछ अनुदान मिल जाता है. इसलिए यहां से यंत्र की खरीदारी करते हैं.
बाजार से अधिक मूल्य मेले में
हेमजापुर निवासी किसान धीरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि मेले में जो भी कृषि यंत्र बेचे जा रहे हैं. उसका मूल्य बाजार से अधिक रखा गया है. जबकि यहां बाजार से कम मूल्य होना चाहिए.
किसानों की हकमारी
हवेली खड़गपुर प्रखंड के बहिरा निवासी किसान सुदाम यादव ने बताया कि कृषि मेले में किसानों की हकमारी हो रही है. कृषि यंत्र के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है. मेले में बाजार से भी अधिक मूल्य पर यंत्र को बेचा जा रहा है.
15-20 प्रतिशत का अंतर
सिंघिया निवासी किसान जयशंकर प्रसाद यादव ने बताया कि कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत अनुदान रहने पर भी मेले में बाजार के मूल्य से 15-20 प्रतिशत का अंतर है. जबकि बाजार मूल्य से 50 फीसदी का अंतर होना चाहिए.
प्रक्रिया में हो बदालव
बहिरा निवासी किसान बबलू यादव ने बताया कि अनुदान की प्रक्रिया में बदलाव करनी चाहिए. मेले के बजाय जो किसान बाजार से कृषि यंत्र खरीदते हैं उस पर अनुदान देना चाहिए. क्योंकि मेले के अनुसार बाजार में कृष यंत्र का मूल्य काफी कम है.
