प्रतिनिधि , हवेली खड़गपुर’ जरा-जरा कभी बेचैन भी करो हमको, जरा-जरा सा मगर इत्मीनान रहने दो ‘ उक्त गजल की पंक्तियां अपने गजल संग्रह ‘ मुझमे कुछ है जो आइना सा है ‘ अपनी चुनिंदा गजल पूर्व डीआइजी धु्रव नारायण गुप्त ने श्रोताओं के बीच प्रस्तुत किया. वे खड़गपुर अनुमंडल मुख्यालय में आयोजित काव्य गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. युवा कवि प्रदीप पाल ने पेशावर में हुई सामूहिक रूप से हत्या और असम में आदिवासियों के नरसंहार से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को अपनी कविताओं के माध्यम से ‘ लानत है नराधम हत्यारों, हर मुल्क की मांओं की बद्दुआएं तुम्हारे लिए है ‘ सुना कर उपस्थित श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया. कवि राजकिशोर केसरी ने मां की ममता का हार्दिक विश्लेषण करते हुए ‘ प्यार जब होता है रमवतिया जाती है, पहाड़ तोड़ती है पत्थर टूटती है खु ‘ कविता की पंक्तियां सुना कर खूब वाहवाही लूटी. इसके अलावे अजय चरणम, ब्रह्मदेव बंधु, दयानंद केसरी उर्फ मुन्ना केसरी ने कविताओं की सराहना की. इससे पूर्व खड़गपुर की मिट्टी के मानस से आत्मीय रूप से जुड़े कवि शायर बिहार के पूर्व प्रशासनिक पुलिस पदाधिकारी व पूर्व प्राचार्य प्रो. रामचरित्र प्रसाद सिंह ने खड़गपुर के आगमन पर कूची के पुरोधा विश्व प्रख्यात चित्रकार आचार्य नंदलाल बसु की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अपना आदर समर्पित किया. मौके पर पूर्व प्राचार्य उमेश कुंवर उग्र, गजनफर अली खां, शशि सौरभ, गोरेलाल मंडल, रामखेलावन साह, शैलेश कुमार, संजीव कुमार मुख्य रूप से उपस्थित थे.
जरा-जरा कभी बेचैन भी करो हमको...
प्रतिनिधि , हवेली खड़गपुर’ जरा-जरा कभी बेचैन भी करो हमको, जरा-जरा सा मगर इत्मीनान रहने दो ‘ उक्त गजल की पंक्तियां अपने गजल संग्रह ‘ मुझमे कुछ है जो आइना सा है ‘ अपनी चुनिंदा गजल पूर्व डीआइजी धु्रव नारायण गुप्त ने श्रोताओं के बीच प्रस्तुत किया. वे खड़गपुर अनुमंडल मुख्यालय में आयोजित काव्य गोष्ठी […]
