चेहल्लुम पर निकला ताजिया

फोटो संख्या : 4,5,6फोटो कैप्सन : ताजिया प्रतिनिधि, मुंगेर मुंगेर और आस-पास के क्षेत्रों में पारंपरिक रीति रिवाज के साथ गम का त्योहार चेहल्लुम मनाया. शहीद हसन-हुसैन की शहादत की याद में मुहर्रम मनाया जाता है. उसी के 40 दिन बाद चेहल्लुम मनाने की परंपरा रही है. मुंगेर में चेहल्लुम को लेकर ताजिया और सिपल […]

फोटो संख्या : 4,5,6फोटो कैप्सन : ताजिया प्रतिनिधि, मुंगेर मुंगेर और आस-पास के क्षेत्रों में पारंपरिक रीति रिवाज के साथ गम का त्योहार चेहल्लुम मनाया. शहीद हसन-हुसैन की शहादत की याद में मुहर्रम मनाया जाता है. उसी के 40 दिन बाद चेहल्लुम मनाने की परंपरा रही है. मुंगेर में चेहल्लुम को लेकर ताजिया और सिपल निकाले गये तथा मुसलिम धर्मावलंबियों ने करबला के मैदान को याद किया. इस दौरान रात भर लोग लाठी-डंडा, भाले-फरसे जैसे पारंपरिक हथियारों से करतब दिखाते रहे. युवाओं में इसको लेकर नया जोश था. डंके की आवाज से क्षेत्र गुंजायमान होता रहा. साथ ही हसन-हुसैन की शहादत को लेकर नारे भी लगाये गये. मुंगेर के गोला से निकली तजिया शीशमहल की सजावट इस दौरान धर्मांवंलबियों में आकर्षण का केंद्र बना रहा. दिलावरपुर, नीलम रोड, हजरतगंज तथा बड़ा बाजार के ताजिये के साथ उनका गोल भी चल रहा था. पूरी रात रतजगा कर मुसलिम धर्मावंलबियों ने चेहल्लुम को परंपरा के अनुसार संपन्न किया.

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