मुंगेर : सदर अस्पताल में एनजीओ के सफाइकर्मियों ने मंगलवार को दूसरे दिन भी काम नहीं किया. जिसके कारण अस्पताल की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गयी. विभिन्न वार्डों में गंदगी पड़े रहने के कारण सदर अस्पताल की स्थिति नारकीय हो गयी और गंदगी के बीच ही मरीज अपना इलाज करवाने को विवश रहे.
वहीं अस्पताल प्रशासन द्वारा विभिन्न वार्डों की साफ-सफाई के लिए 48 घंटे बाद भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी. जबकि यहां दर्जन भर स्वास्थ्य विभाग का स्थायी सफाईकर्मी भी हैं. विदित हो कि पहली जुलाई से सदर अस्पताल में नये एनजीओ द्वारा सफाई का कार्य किया जाना है. किंतु उसके द्वारा सफाई का कार्य दो दिनों तक नहीं किया गया.
गंदगी के कारण फैल सकती है संक्रामक बीमारी: सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डों में मंगलवार को भी गंदगी के बीच ही मरीजों का इलाज किया गया. इमरजेंसी वार्ड में जहां न सिर्फ प्रत्येक बेड के नीचे सिरिंज व कॉटन फेंका हुआ है, वहीं बेड के नीचे शौच भी फैली हुई थी. उसी लैट्रीन के उपर लगे बेड पर मरीजों का इलाज चल रहा था. वृद्धा वार्ड में फर्श पर दर्जनों स्लाइन की बोतलें लुढ़की हुई थी.
पुरुष सर्जिकल वार्ड व पुरुष मेडिकल वार्ड में भी कुछ ऐसी ही स्थिति थी. वहीं आईसोलेशन वार्ड में फैली गंदगी के कारण इतना दुर्गंध हो रहा था कि वहां भरती रोगी को सांस लेने तक में परेशानी हो रही है. जबकि इस वार्ड में डायरिया से पीड़ित मरीजों का इलाज होता है और डायरिया के मरीजों के लिए साफ-सफाई काफी मायने रखता है
. इसके अलावे प्रसव केंद्र में तो लोगों का प्रवेश करना भी मुश्किल सा हो गया है. इतनी दुर्गंध फैल रही है कि कई गर्भवती महिलाओं को ुल्टी तक हो गयी. वहीं प्रसव वार्ड में फैली गंदगी व दुर्गंध के कारण जच्चा-बच्चा को संक्रमण होने की संभावना बढ़ गयी है. महिला सर्जिकल वार्ड, महिला मेडिकल वार्ड तथा शिशु वार्ड में भी गंदगी का अंबार लगा हुआ है.
कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ पुरुषोत्तम कुमार ने कहा कि आउटसोर्स संस्था द्वारा यदि जल्द ही कोई व्यवस्था नहीं की गयी, तो वे कार्रवाई को बाध्य होंगे. टेंडर के अनुसार आउटसोर्स की जिम्मेदारी है कि वह किस मजदूर से सफाई करायें और कैसे करायें.
