अगर रुका खड़गपुर झील का जीर्णोद्धार कार्य तो किसान होंगे प्रभावित
हवेली खड़गपुर : सिंचाई योजना के तहत खड़गपुर झील के जीर्णोद्धार में लगे निर्माण एजेंसी द्वारा जटातरी के पास गाद निकाला जा रहा था. इस दौरान बुधवार की देर रात माओवादी दस्ता ने हमला बोल दिया. माओवादियों ने जहां चार पोकलेन मशीन, दो हाइवा, एक मोटरसाईकिल को आग के हवाले कर दिया. वहीं अंधाधूंध फायरिंग भी की. जबकि आठ मजदूरों को बंधक बना कर माओवादी अपने साथ लेकर जंगल की ओर चले गये. चार मजदूरों को जहां रात में ही छोड़ दिया. वहीं चार मजदूरों को पुलिस दविश के कारण गुरुवार को शाम जंगल में मुक्त कर दिया. आशंका जताया जा रहा है कि लेवी की डिलिंग होने के बाद ही नक्सलियों ने मजदूरों को मुक्त किया है.
क्या है मामला: सिंचाई योजना अंतर्गत बिहार सरकार द्वारा 87 करोड़ की लागत से खड़गपुर झील जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ किया गया. निर्माण कार्य में लगे रामकृपाल सिंह कंस्ट्रेक्शन द्वारा जटातरी के पास सॉल्ट निकासी का कार्य किया जा रहा है. बुधवार की देर रात 40 से 50 की संख्या में हथियारबंद नक्सलियों का दस्ता कार्यस्थल पर पहुंच कर अंधाधूंध फायरिंग प्रारंभ कर दी.
इसके कारण वहां मौजूद मजदूर एवं कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गयी. नक्सलियों ने बम मार कर कार्यस्थल पर रखे चार पोकलेन मशीन, दो हाईवा ट्रक, एक मोटरसाईकिल को आग के हवाले कर दिया. इसके कारण वाहन जल गया. कंपनी को लगभग तीन करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. वाहन को आग के हवाले करने के बाद कार्यस्थल पर मौजूद उज्जवल कुमार सिंह, दीपक कुमार, मकसूद आलम, हमीद, सहदेव मंडल, संजीव पांडे, पिंटू अंसारी, महमूद की जमकर पिटाई की और सभी को अपने साथ लेकर जंगल चले गये.
दहशत में हैं कंस्ट्रक्शन कंपनी के कर्मी: माओवादी हमले के बाद कंपनी में शेष बचे कर्मी जो पड़ोस के राज्य व विभिन्न जिले से आए हुए हैं उनमें दहशत है.ये घटना के बाद से जटातरी से निकल कर खड़गपुर में शरण लिये हुए है. वहीं हाइवा ट्रक व जले हुए अन्य मशीन के मालिक भी गुरुवार को खड़गपुर पहुंचे व स्थिति की जानकारी ली. इधर कंपनी के ऑनर रामकृपाली व सिंचाई विभाग के वरीय पदाधिकारी सभी एक-एक कर घटना की जानकारी मजदूरों से ले रहे थे.
निर्माण कार्य पर संकट: नक्सलियों की आक्रमक उपस्थिति एवं वारदात से झील के डिसिलट्रेशन व जीर्णोद्धार कार्य पर ग्रहण लगता दिख रहा है. एक ओर जहां घटना से कंपनी के तमाम कर्मचारी में भय का माहौल है. वहीं दूसरी ओर सिंचाई विभाग के अधिकारियों में भी दहशत है. योजना 87 करोड़ की है. जिसके द्वारा गाद निकालने का काम किया जा रहा था. इस कार्य से क्षेत्र के किसानों को काफी राहत होने वाली है. यह योजना पूर्ण होने के बाद खड़गपुर के किसानों को लगभग 5310 हेक्टेयर खेतों में सिंचाई होती. लेकिन घटना के बाद निर्माण कार्य पर संकट मंडरा रहा है.
नक्सलियों ने कहा, लेवी की राशि क्यों नहीं पहुंचायी
नक्सलियों के चंगुल से मुक्त हुए सहदेव मंडल, संजीव पांडे, पिंटू अंसारी, महमूद ने बताया कि रात में हमलोग अपने बसेरे में खाना खा रहे थे. तभी बाहर आग की बड़ी-बड़ी लपटें दिखी. हमलोग भागते-दौड़ते वाहन पार्किंग के पास पहुंचे तो देखा कि मोटर साइकिल सहित 4 पोकलेन मशीन, दो हाइवा ट्रक से आग की लपटे उठ रही थी. तभी 40-50 की संख्या में हथियारबंद नकाबपोश नक्सलियों पर हमारी नजर पड़ी. पहले तो नक्सलियों ने हमलोगों को पीटा. उसके बाद हाथ में रस्सी लगाकर अपने साथ कुल 8 लोगों को जंगल ले गये. हालांकि मुझे तीन व तीन अन्य लोगों को 5 किलोमीटर जंगल ले जाने के बाद पुनः छोड़ दिया और बोला भागो. तब जाकर हम चार साथी किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से निकले. मजदूरों ने बताया कि कार्यस्थल से नक्सली जब हम लोगों को अपने साथ ले जा रहे थे तो कुछ दूर जाने के बाद 40-50 की संख्या में नक्सलियों की एक और टुकड़ी मिली. कुछ दूर जाने के बाद लगभग 50-50 की संख्या में दो नक्सलियों की टुकड़ी और मिली. चार-पांच टुकड़ियों में 200 से अधिक नक्सली रास्ते में दिखे. नक्सलियों ने कहा कि मुंशी शशि को जब हम लोगों ने लेवी के लिए बोल दिया था तो बिना लेवी की राशि दिए योजना का कार्य क्यों प्रारंभ किया.
पुलिस लगातार कर रही थी छापेमारी
घटना के बाद पुलिस सतर्क हो गयी. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधीक्षक गौरव मंगला, एएसपी अभियान राणा नवीन रात में ही खड़गपुर पहुंच गये. वहीं गुरुवार को डीआइजी जितेंद्र मिश्र खड़गपुर पहुंच कर कैंप कर रहे थे. नक्सलियों द्वारा अपहृत किये गये मजदूरों को मुक्त कराने के लिए एसएसबी, एसटीएफ, सीआरपीएफ, बीएमपी एवं जिला बल के जवानों की टीम बनाकर लगातार जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था.
