टेंडर में भाग नहीं लें पायेंगे सफाई से जुड़े वर्तमान एनजीओ

मुंगेर : नगर निगम के अधीन कार्यरत तीन स्वयंसेवी संस्था अब भविष्य में निगम के टेंडर में भाग नहीं ले पायेंगे. इन एनजीओ द्वारा सफाई कार्य में लापरवाही बरतने के मामले में निगम बोर्ड ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. जिसमें कहा गया है कि एनजीओ द्वारा कूड़ा उठाव, डोर टू डोर कचरा संग्रह, नालों […]

मुंगेर : नगर निगम के अधीन कार्यरत तीन स्वयंसेवी संस्था अब भविष्य में निगम के टेंडर में भाग नहीं ले पायेंगे. इन एनजीओ द्वारा सफाई कार्य में लापरवाही बरतने के मामले में निगम बोर्ड ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. जिसमें कहा गया है कि एनजीओ द्वारा कूड़ा उठाव, डोर टू डोर कचरा संग्रह, नालों की सफाई सही ढंग से नहीं करने एवं श्रमिकों को ससमय पारिश्रमिक भुगतान नहीं करने के कारण वर्तमान एनजीओ को निगम ने डिबार कर दिया है. क्योंकि इन एनजीओ के गलत कार्यप्रणाली के कारण बार-बार निगम प्रशासन को फजीहत झेलनी पड़ी और हड़ताल जैसी समस्या भी उत्पन्न हुई.
निगम के टेंडर में भाग नहीं लेंगे तीन एनजीओ : सफाई कार्य कर रहे एनजीओ जीवन ज्योति सोताडीह, सफल एजुकेशनल वेलफेयर सोसाइटी व महिला विकास संस्था द्वारा असंतोषजनक कार्य करने एवं एकरारनामा के शर्तों का उल्लंघन करने के कारण निगम बोर्ड ने निर्णय लिया है कि यह एनजीओ निगम से संबंधित निविदा में भाग नहीं लेंगे. जिससे एनजीओ की परेशानी बढ़ गयी है. क्योंकि कई एनजीओ वर्षों से मुंगेर में सफाई कार्य पर कुंडली मारकर बैठा रहा है.
निगम एनजीओ से लेगा मानव बल : एनजीओ द्वारा समुचित सफाई नहीं किये जाने से निगम बोर्ड ने स्वयं शहर की सफाई कराने का निर्णय लिया है. सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि एनजीओ द्वारा कूड़ा उठाव, डोर टू डोर कचरा संग्रह एवं श्रमिकों को समय पर पारिश्रमिक भुगतान नहीं करता है. जिस कारण सफाइकर्मी हड़ताल कर देते हैं और शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा जाती है. ऐसी स्थिति में मानव बल के लिए निविदा प्रकाशित नहीं होने तक वर्तमान में कार्यरत स्वयंसेवी संस्था द्वारा सफाई कार्य किया जायेगा. नया टेंडर होने के बाद निगम अपने संसाधन का स्वयं उपयोग करेगी और सफाई का कमान संभालेगी.
सफाई के मुद्दे पर बोर्ड की बैठक में हुआ था हंगामा : गत माह नगर निगम बोर्ड की बैठक में वार्ड पार्षदों ने सफाई की बदहाल स्थिति को लेकर जोरदार हंगामा किया था. जिसमें कई पार्षदों ने आरोप लगाया था कि शहर की सफाई व्यवस्था नारकीय है. जब शहरवासियों को पानी नहीं दे सकते तो कम से कम सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखा जाये. जिसके बाद निगम बोर्ड हरकत में आयी और तीनों एनजीओ के कार्य को असंतोषजनक पाते हुए वर्तमान सफाई व्यवस्था को रद्द करते हुए निगम नयी निविदा प्रकाशित करेगी और एनजीओ से सिर्फ मानव बल की आपूर्ति करेगी.

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