बन रही फर्जी उपस्थिति प्रशासनिक तंत्र फेल

मुंगेर : विद्यालय को शिक्षा का मंदिर कहा गया है. जहां बच्चों को न सिर्फ किताबी ज्ञान दिया जाता है, बल्कि उसे ईमानदारी का भी पाठ पढ़ाया जाता है़ किंतु जब इस विद्या के मंदिर में बच्चों को ज्ञान बांटने वाले ही बेईमान बन जाएं, तो फिर बच्चों के बेहतर भविष्य की कल्पना कैसे की […]

मुंगेर : विद्यालय को शिक्षा का मंदिर कहा गया है. जहां बच्चों को न सिर्फ किताबी ज्ञान दिया जाता है, बल्कि उसे ईमानदारी का भी पाठ पढ़ाया जाता है़ किंतु जब इस विद्या के मंदिर में बच्चों को ज्ञान बांटने वाले ही बेईमान बन जाएं, तो फिर बच्चों के बेहतर भविष्य की कल्पना कैसे की जा सकती है़ दुर्दशा यह है कि विद्यालयों में चल रहे फर्जीवाड़े व बेईमानी के खेल को रोकने में प्रशासनिक तंत्र भी फेल है़ सदर प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय सिकंदरपुर में भी इन दिनों कुछ ऐसा ही फर्जीवाड़ा का खेल चल रहा है़

जहां बच्चों की उपस्थिति के दोगुने से भी अधिक बच्चों की फर्जी उपस्थिति बना दी जाती है तथा इसी आधार पर फर्जी तरीके से एमडीएम का बिल भी तैयार किया जाता है़

18 के जगह 42 बच्चों की बनी उपस्थिति
मध्य विद्यालय सिकंदरपुर में मध्याह्न भोजन के समय गुरुवार को प्रभात खबर की टीम पहुंची. उस समय बच्चे हाथ धोकर पास के ही एक कक्ष में भोजन के लिए बैठ रहे थे. कुल 18 बच्चे भोजन करने के लिए कमरे में पंगत बना कर बैठ गये. रसोइया द्वारा सभी को बारी-बारी से थाली तथा चावल, दाल व सब्जी परोसी गयी. रसोइया से जब पूछा गया कि और बच्चे कहां गये, तो उसने बताया कि जो बच्चा आया है उसे वह खाना खिला रही है. बांकी बच्चे कहां गये या स्कूल आये-नहीं आये उसे पता नहीं है़
सभी 18 बच्चों के खाने के बाद तीन-चार लोगों के लायक और भोजन बचा हुआ था. वहीं जब इसकी पड़ताल के लिए विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार से पूछा गया कि कितने बच्चे स्कूल में उपस्थित हुए हैं तो उन्होंने रजिस्टर देखते हुए बताया कि कुल 42 बच्चे आये हैं. विद्यालय के विभिन्न कमरों का मुआयना करने के बाद भी बांकी बच्चे व उसका बस्ता कहीं नजर ही नहीं आया. बच्चे यदि आये रहते तो कम से कम उसके बस्ते कक्षा में नजर आती. किंतु कक्षाओं में ऐसा नजारा नहीं दिखा.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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