रिश्वत लेते पकड़े गये विभाग के कर्मियों को अनुचित ढंग से लाभ पहुंचाने का आरोप
मुंगेर : भवन प्रमंडल मुंगेर के कार्यपालक अभियंता वासुदेव प्रसाद मंडल को सरकार ने डिमोशन करते हुए सहायक अभियंता बना दिया है. वासुदेव मंडल पर आरोप है कि उन्होंने 2012 में पूर्णिया भवन प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता सह प्रभारी अधीक्षण अभियंता रहते हुए विभागीय निर्देशों का उल्लंघन किया था और घूस लेते रंगेहाथ पकड़े गये भवन निर्माण विभाग के कर्मचारी शत्रुघन प्रसाद सिंह व रंजीत सिंह को अनुचित ढंग से लाभ पहुंचाते हुए निलंबन मुक्त कर दिया था. लंबी सरकारी प्रक्रिया के बाद 20 मार्च 2018 को विभाग ने इन्हें कार्यपालक अभियंता से सहायक अभियंता बना दिया.
क्या है मामला : 2012 में भवन प्रमंडल किशनगंज के लिपिक सह टंकक शत्रुघन प्रसाद सिंह व वरीय लेखा लिपिक सह रोकड़पाल रंजीत सिंह को घूस लेते रंगेहाथ पकड़ा था, जिन्हें विभागीय स्तर पर 15 मई 2012 को निलंबित करने का निर्देश दिया गया. पर पूर्णिया के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सह प्रभारी अधीक्षण अभियंता वासुदेव प्रसाद मंडल ने सरकार के निर्देश का उल्लंघन करते हुए शत्रुघन प्रसाद सिंह को निलंबन मुक्त कर दिया और उसे भवन कार्य प्रमंडल खगड़िया में पदस्थापित कर दिया.
जबकि दूसरे कर्मचारी रंजीत सिंह के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की. इस मामले में वासुदेव प्रसाद मंडल के विरुद्ध आरोप प्रपत्र क का गठन करते हुए विभागीय संकल्प संख्या 5908 दिनांक 5 जून 2014 द्वारा विभागीय कार्रवाई संस्थित की गयी थी. मामले के जांच के दौरान विभागीय जांच आयुक्त सह राजस्व पर्षद के अपर विभागीय जांच आयुक्त ने वासुदेव मंडल के विरुद्ध गठित सभी आरोपों को पूर्णत: प्रमाणित पाया था.
लगे हैं गंभीर आरोप : सरकारी प्रपत्र में वासुदेव प्रसाद मंडल पर गंभीर आरोप लगाये गये हैं. पत्र में कहा गया है कि ट्रैप अर्थात घूस लेते रंगेहाथ पकड़ने जैसे गंभीर मामले में उन्होंने अपने दायित्व का निर्वहन करने में उदासीनता बरती. विभागीय निर्देश का भी उल्लंघन किया. इस मामले में सरकार ने वासुदेव मंडल को कार्यपालक अभियंता से सहायक अभियंता के मूल वेतनमान पर अवनति कर दंड देने का निर्णय लिया और इस संदर्भ में राज्य के मुख्यमंत्री से भी अनुमोदन प्राप्त किया गया.
मुंगेर में भी रहा विवादित कार्यकाल
भवन प्रमंडल के अभियंता वासुदेव प्रसाद मंडल 8 जुलाई 2016 को मुंगेर में पदभार ग्रहण किया था और उनका कार्यकाल यहां कई मामले में विवादों से घिरा रहा. मनमाने ढंग से करोड़ों के कार्यों का संपादन किया गया. यहां तक कि कार्य पहले निविदा बाद में जैसे मामले भी सामने आये. मार्च लूट में जब बड़े पैमाने पर सरकारी भवनों के मरम्मत की योजना चल रही थी तो उसमें सदर अस्पताल व स्वास्थ्य विभाग के भवनों के जीर्णोद्धार का कार्य भी किया गया.
एक ओर जहां सिविल सर्जन कार्यालय के जीर्णोद्धार का कार्य बिना निविदा के ही पहले करा दिया गया और फिर बाद में निविदा निकाली गयी. वहीं मरम्मत कार्य में व्यापक स्तर पर अनियमितता बरती गयी. खासकर फर्श पर टाइल्स बिछाने में मानक के विरुद्ध बालू पर ही सीमेंट का घोला डालकर टाइल्स लगा दिया गया है. जबकि कई भवनों में पुराने प्लास्टर हटा कर पुन: प्लास्टर किया जाना था, लेकिन उसका भी पालन नहीं किया गया. यदि मुंगेर में पिछले तीन माह के दौरान भवन निर्माण के मरम्मत कार्यों की जांच हो तो यहां करोड़ों का घोटाला सामने आ सकता है.
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