ठंड बढ़ता जा रहा रिकार्ड बनाने की तरफ, 6 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़का पारा
मुंगेर/संग्रामपुर : पूस की रात तो लोगों के लिए दुखदायी नहीं बनी, लेकिन माघ की ठंड ने लोगों को ठिठुरने पर विवश कर दिया है. न दिन में चैन और न रात में नींद आ रही है. कंपकपा देने वाली ठंड में लोग जैसे-तैसे जिंदगी बिता रहे हैं. इस ठंड ने राजा-रंक-फकीर सभी का जीना दूभर कर दिया है. पशु-पक्षी तक अपनी दिनचर्या भूल गये. क्योंकि ठंड लगा तार रिकार्ड बनाने की तरफ बढ़ता जा रहा है और पारा लुढक कर छह डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. वैसे शुक्रवार को दिन में गुलाबी धूप ने लोगों को थोड़ी राहत दी. लेकिन दिन ढलते ही कनकनी से लोग परेशान हो उठे.
एक सप्ताह से पूरे क्षेत्र में ठंड की आक्रामकता लगातार बढ़ती जा रही है. पूस की रात की ठंड का एहसास माघ मास में हो रहा है. दिन के 10 बजे तक कनकनी रहने की वजह से लोग अपने घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. फिर 4 बजते-बजते लोग घर की ओर लौटते नजर आते हैं. ठंड की इस आक्रामकता को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर जो अलाव की व्यवस्था की गयी है, वह नाकाफी है. साथ ही गरीबों के बीच कंबल वितरण की व्यवस्था रस्म अदायगी बन कर रह गयी है.
ठंड एवं सर्द हवा के कारण सबसे अधिक गरीब, बूढ़े व बच्चे परेशान हैं. एक ओर जहां लोग घरों में दुबके रहने को विवश हैं. वहीं आम जनजीवन भी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. शुक्रवार की सुबह से ही सर्द पछिया हवा चलने से कनकनी बढ़ गयी. दोपहर में थोड़ी देर के लिए धूप भी निकली, लेकिन सर्द हवा चलने के कारण इसका कोई असर नही पड़ा. फिर शाम 5 बजते ही ठंड का प्रकोप काफी बढ़ गया.
दैनिक मजदूरों की बढ़ी परेशानी : ठंड के कारण दैनिक मजदूरों की परेशानी काफी बढ़ गयी है. न ठेला वालों को काम मिल रहा है और न ही रिक्शा वालों को सवारी मिल रही है. राज मिस्त्री और मजदूर पूरी तरह से बेकार हो गये हैं. इनके सामने ठंड ने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न कर दी है. हर तरफ ठंड का सितम देखने को मिल रहा है.
ठंड ने किसानों की तोड़ी कमर : कड़ाके की ठंड एवं पाला पड़ने से किसानों की फसलों को नुकसान हो रहा है. खास कर सरसों, आलू एवं दलहनी फसलों पर झुलसा रोग का प्रभाव काफी बढ़ गया है. किसान विपिन बिहारी सिंह, रामखेलान शर्मा, पोरस यादव, रामस्नेही यादव, हरिनंदन यादव ने बताया कि तेलहनी फसलों के साथ-साथ अन्य फसलों में व्यापक क्षति हुई है. खासकर आलू की फसल तो झुलसा रोग लगने से पूरी तरह खराब हो गयी है.
प्रशासनिक व्यवस्था नाकाफी: मुंगेर शहर में 15 से 20 स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था प्रशासन द्वारा की गयी. अस्पताल, बस स्टैंड, नीलम चौक सहित अन्य स्थानों पर अलाव जलाये जा रहे हैं. एक स्थान पर प्रशासन द्वारा 20 किलो लकड़ी दी जानी है. लेकिन लकड़ी गिराने में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है. पांच किलो लकड़ी भी एक सेंटर पर नहीं गिरायी जा रही है. सदर अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा कुछ स्थानों पर कंबल का वितरण किया गया.
लेकिन यह रस्म अदायगी से ज्यादा कुछ नहीं रहा. अधिकांश गरीब, प्रशासन के आने की बाट जोह रहे हैं. इधर संग्रामपुर में प्रशासन द्वारा पूरे प्रखंड मुख्यालय में मात्र चार जगहों महावीर स्थान चौक, अस्पताल चौक, ब्लॉक गेट एवं संग्रामपुर बस्ती स्टैंड चौराहा पर सार्वजनिक अलाव की व्यवस्था 27 दिसंबर से की गयी है. जो काफी कम है.
कहां गये एनजीओ व समाजसेवी
जिले में एनजीओ व समाजसेवियों की कमी नहीं है. हर रोज अखबार में बने रहने के लिए कुछ न कुछ जागरूकता कार्यक्रम की तस्वीर व फोटो तो छपवाते थे. लेकिन आज वे ढूंढ़ने से भी नहीं मिल रहे. ठंड अपने चरम पर है. हाड़ कंपा देने वाली इस ठंड में समाज सेवा का दंभ भरने वाले समाजसेवी गरीबों को भूल गये. जबकि सरकारी महकमे से लाखों रुपये कमाने वाले एनजीओ भी मुंगेर के गरीबों पर ध्यान देने की जहमत नहीं उठा रहे हैं.
