हर्ट मरीज के साथ प्रसूता, अस्थमा व टीबी के मरीज को भी किया जा रहा भर्ती
मुंगेर : वैसे तो सदर अस्पताल का जेनरल वार्ड भी संक्रमण के जद में है़ वहीं यहां का आइसीयू जेनरल वार्ड से भी बदतर स्थिति में पहुंच चुका है, जहां हर्ट मरीज के साथ-साथ प्रसूता, अस्थमा व टीबी के मरीज को भी भर्ती किया जा रहा है़ हो सकता है कि अन्य मरीजों को भी हर्ट से संबंधित कोई परेशानी हो, पर एक ही कमरे में अलग-अलग प्रकार के रोग से ग्रसित मरीजों को भर्ती करने से दूसरे मरीजों में संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है़ इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन उदासीन है़ स्थिति यह है कि खुद आइसीयू कोमा में चला गया है़
आइसीयू में संक्रमित मरीजों को भी किया जाता है भर्ती: चिकित्सकों की मानें तो आइसीयू में वैसे मरीज को भर्ती किया जाना चाहिए, जो हृदय रोग सहित अन्य गंभीर रोग से पीड़ित हो, पर किसी भी सूरत में संक्रामक रोग से ग्रसित मरीज को वैसे आइसीयू में भर्ती नहीं किया जा सकता है, जिसमें प्रत्येक बेड सेपरेट किया हुआ न हो़ सदर अस्पताल का आइसीयू एक ही कमरे में संचालित होता है, जहां कुल छह मरीजों के लिए बेड लगाये गये है़ं पर एक भी बेड सेपरेट नहीं है़ बावजूद यहां पर हर्ट मरीज के अलावे प्रसूता, अस्थमा व टीबी से संक्रमित मरीजों को भर्ती कर दिया गया है़
हो सकता है संक्रमण: आइसीयू में संदलपुर निवासी हृदय रोगी राजेश रंजन तथा हवेली खड़गपुर प्रखंड के प्रसंडो निवासी हरदेव प्रसाद सिंह भर्ती हैं. इसके अलावे कासिम बाजार निवासी आकाश कुमार की पत्नी अन्नू कुमारी को भी भर्ती किया गया है, जिसका सीजेरियन प्रसव कराया गया है़ वहीं असरगंज प्रखंड के सतीस्थान निवासी ब्रह्मदेव यादव की पत्नी मालती देवी भी आइसीयू में भर्ती है, जो अस्थमा रोग से ग्रसित है़ सबसे दुर्भाग्य की बात तो यह है कि टीबी मरीज को भी आइसीयू में ही भर्ती कर दिया गया है़ मालूम हो कि शहर के गुलजार पोखर निवासी एक मरीज पिछले दो दिनों से आइसीयू में भर्ती है़
चिकित्सक व स्टाफ की रहती है कमी: आइसीयू में सातों दिन 24 घंटे दो स्टाफ नर्स तथा एक वार्ड एटेंडेंट को मौजूद रहना है, पर वर्तमान में यहां सिर्फ एक स्टाफ नर्स ही तैनात है़ वहीं एक ही वार्ड एटेंडेंट से आइसीयू, नशामुक्ति केंद्र तथा इमरजेंसी वार्ड में भी काम लिया जाता है़ वहीं जिन चिकित्सकों की ड्यूटी इमरजेंसी वार्ड में रहती है, उन्हीं के जिम्मे आइसीयू भी रहता है़ ऐसे में चिकित्सक भी एक साथ इमरजेंसी तथा आइसीयू के मरीजों के इलाज में खासे परेशान रहते हैं.
आइसीयू में लगी रहती है परिजनों की भीड़: सर्वविदित है कि आइसीयू में मरीज के साथ परिजनों के रहने पर शख्त मनाही है, ताकि मरीजों को बाहरी संक्रमण से बचाया जा सके़ लेकिन सदर अस्पताल के आइसीयू की स्थिति बदहाल है़ यहां आइसीयू कक्ष के भीतर हर मरीज के साथ दो-तीन परिजन भी मौजूद रहते हैं तथा बार-बार बाहर-भीतर होते रहते हैं. इससे हमेशा मरीजों को बाहरी संक्रमण का खतरा बना रहता है़ आइसीयू कक्ष में अनाधिकृत व्यक्ति को प्रवेश से रोकने के लिए एक सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था होनी चाहिए, पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा आइसीयू के लिए सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं किये गये हैं.
