गतिरोध. कर्मियों की कमी, अक्तूबर तक सुपरविजन के 954 मामले लंबित
मुंगेर : कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं अपराध पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने मुंगेर जिले के छह थानों को अपग्रेड किया और यहां सब इंस्पेक्टर की जगह इंसपेक्टर की पोस्टिंग की गयी. जबकि पहले से ही जिले में पांच पुलिस सर्किल इंस्पेक्टर का पद स्वीकृत है. लेकिन अधिकांश थाना एवं सर्किल में न तो टाइपिस्ट है और न ही रीडर. मैन पावर की कमी के कारण इंस्पेक्टर लेवल पर होने वाले ननएसआर केस का सुपरविजन रिपोर्ट सिपाही तैयार कर रहा. वही इंस्पेक्टर का डिक्टेशन लेता है और फिर उसे टाइप करता है. हाल यह है कि मुंगेर जिले के थानों में अक्तूबर माह तक कुल 954 सुपरविजन के मामले लंबित हैं.
जिले के छह थानों को अपग्रेड कर उसके थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी बनाये गये हैं. जिनका दायित्व सामान्य थानाध्यक्ष के तौर पर प्राथमिकी दर्ज करने से लेकर अपराध पर लगाम, विधि व्यवस्था को कायम करना, गश्ती व कांडों का अनुसंधान तो है ही, वे अपने थाना क्षेत्र के ननएसआर मामलों के सुपरविजन भी करेंगे. इसके लिए इंस्पेक्टर को रीडर व टाइपिस्ट की दरकार है.
लेकिन अधिकांश इंस्पेक्टर के पास इसकी सुविधा नहीं है. बताया जाता है कि वे अपने अधीनस्थ साक्षर सिपाही को ही मुंशी के रूप में काम कराता है और वही मुंशी रीडर एवं टाइपिस्ट की भी भूमिका निभाता है. अधिकांश थानेदार रोजाना विधि व्यवस्था संधारण एवं अत्यधिक काम होने के कारण सुपरविजन रिपोर्ट तैयार करने के लिए समय नहीं निकल पाता है और लंबित मामलों की संख्या बढ़ती जाती है. अक्तूबर माह तक जिले में 954 मामले लंबित हैं. जिसमें एसआर केस की संख्या 723 है.
जिसका सुपरविजन अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को करना है. जबकि ननएसआर केस की संख्या 231 है. जिसका सुपरविजन सर्किल इंसपेक्टर एवं इंस्पेक्टर को करना है. लेकिन मैन पावर की कमी के कारण सुपरविजन लंबित ही रह जाता है और उसकी संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही चली जा रही है.
तारापुर डीएसपी व इंस्पेक्टर को भी नहीं है रीडर : तारापुर में इंस्पेक्टर तो दूर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को भी टाइपिस्ट व रीडर नहीं है. यहां भी मुंशी के भरोसे ही सुपरविजन का काम चलता है. बताया जाता है कि यहां हर दिन कम से कम 10 मामले एवं उसके अधीन पड़ने वाले असरगंज, संग्रामपुर, हरपुर सहित अन्य थानों में भी मामला दर्ज होता है. जिसमें कुछ साधरण मामले होते हैं तो कुछ एसआर केश होता है. लेकिन दोनों स्तर के मामले का सुपरविजन रिपोर्ट तैयार करने में टाइपिस्ट के अभाव में प्रभावित होता है और लंबित मामलों की संख्या बढ़ती जाती है.
थानेदार के रूप में इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी
आइटी एक्ट और गंभीर प्रवृति से जुड़े केस का अनुसंधान करना
रोजाना एंटी क्राइम चेकिंग और गश्ती के साथ थाना में लोगों की समस्या सुनना
वर्तमान में वाहन चेकिंग अभियान की जिम्मेदारी
पुलिस मुख्यालय से लेकर एसपी और अन्य अधिकारियों के जनसंवाद के मामलों में रिपोर्ट तैयार करना
विधि व्यवस्था, धरना-प्रदर्शन, वीआइपी मूवमेंट में ड्यूटी
कोई घटना होने पर वहां जाना घटना स्थल का निरीक्षण
पासपोर्ट से लेकर चरित्र सत्यापन, आर्म्स लाइसेंस के लिए प्रतिवेदन तैयार करवाना
सुपरविजन नहीं होने का असर
सुपरविजन नहीं होने से कार्रवाई में हो रही है देरी
दुर्घटना और वाहन चोरी के केस में मुआवजा मिलने में देरी
लंबित केस की संख्या में बढ़ोतरी का होना
पीड़ित पक्ष को समय पर नहीं मिल पाता है न्याय
सुपरविजन लंबित रहने के कारण
थानेदारों का रोजाना की विधि व्यवस्था की ड्यूटी में व्यस्त रहना
सुपरविजन रिपोर्ट टाइप करने के लिए अधिकांश थानों में मैनपावर की कमी
केस के अनुसंधानक समय पर डायरी नहीं देते हैं
सुपरविजन के लिए समय पर गवाह का उपस्थित नहीं होना
थानों में लंबित सुपरविजन के केस
थाना का नाम एसआर नन एसआर
कोतवाली 93 19
वासुदेवपुर 38 18
पूरबसराय 25 10
कासिम बाजार 66 32
जमालपुर 50 23
इस्ट कॉलोनी 14 07
धरहरा 18 12
हेमजापुर 11 04
लड़ैयाटांड़ 25 23
मुफस्सिल 83 23
बरियारपुर 38 07
नयारामनगर 16 05
सफियासराय 23 12
हरिणमार 13 02
तारापुर 29 06
असरगंज 23 09
हरपुर 06 02
संग्रामपुर 19 05
टेटियाबंबर 19 05
हवेली खड़गपुर 53 13
शामपुर 18 05
गंगटा 21 05
महिला थाना 04
एससी/एसटी 18
सिपाही निभा रहे रीडर, मुंशी व टाइपिस्ट की भूमिका
मुंगेर जिले में कोतवाली, कासिम बाजार, मुफस्सिल, जमालपुर, इस्ट कॉलोनी एवं हवेली खड़गपुर थाना को अपग्रेड कर इंस्पेक्टर थाना बनाया गया. लेकिन मुफस्सिल व जमालपुर थाने में आज भी सब इंस्पेक्टर थानाध्यक्ष बने हुए हैं. जबकि जमालपुर, कोतवाली, हवेली खड़गपुर, तारापुर एवं मुफस्सिल में सर्किल इंस्पेक्टर का पद सृजित है. जिनके पास तीन-तीन, चार-चार थानों की जबावदेही है. जिले के प्रमुख थानों में अमूमन एक महीने में कम से कम 30 से 40 मामले दर्ज होते हैं. कभी-कभी तो इसकी संख्या 50-60 तक पहुंच जाती है. जिसमें कई मामले साधारण यानी नन एसआर होते है. ऐसे मामलों का अनुसंधान इंस्पेक्टर अथवा सर्किल इंस्पेक्टर करते है. लेकिन रीडर व टाइपिस्ट नहीं रहने के कारण उन्हें काफी परेशानी होती है. अधिकांश थानों में सिपाही ही मुंशी, रीडर एवं टाइपिस्ट की भूमिका अदा करते हैं.
