आयुष चिकित्सक लिख रहे एलोपैथ दवा, रोगियों की जान को खतरा

अनदेखी. जिले में एक दर्जन चिकित्सक किये गये हैं पदस्थापित सस्ते इलाज के लिए की गयी थी आयुष चिकित्सक की नियुक्ति 2014 के बाद इलाज के लिए उपलब्ध नहीं करायी गयी दवा मुंगेर : रोगियों के लिए चिकित्सक भगवान होते हैं. शारीरिक व मानसिक पीड़ा से मुक्ति दिलाने वाले चिकित्सक को ज्ञानवान होना जरूरी है. […]

अनदेखी. जिले में एक दर्जन चिकित्सक किये गये हैं पदस्थापित

सस्ते इलाज के लिए की गयी थी आयुष चिकित्सक की नियुक्ति
2014 के बाद इलाज के लिए उपलब्ध नहीं करायी गयी दवा
मुंगेर : रोगियों के लिए चिकित्सक भगवान होते हैं. शारीरिक व मानसिक पीड़ा से मुक्ति दिलाने वाले चिकित्सक को ज्ञानवान होना जरूरी है. लेकिन यहां के सरकारी अस्पतालों में स्थिति काफी खराब है. होमियोपैथ व आयुर्वेद पद्धति की शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर बनने वाले आयुष चिकित्सक सरकारी अस्पताल में बैठ कर एलोपैथ की दवा लिख रहे हैं. जिसकी उन्होंने पढ़ाई भी नहीं की. अब इस परिस्थिति में यदि रोगी ठीक हो जाये, तो बल्ले-बल्ले, अन्यथा उनकी जान पर खतरा तो रहता ही है.
सरकार ने वर्ष 2010 में ही आयुष चिकित्सकों को सदर अस्पताल सहित विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में बहाल तो किया. लेकिन सरकारी अस्पतालों में होमियोपैथ व आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से इलाज की कोई सुविधा प्रदान नहीं की गयी और न ही आयुष दवा का आवंटन ही किया गया.
आयुष चिकित्सक लिख रहे एलोपैथिक दवा: मेडिकल एक्ट पर यदि नजर डाली जाये, तो आयुष चिकित्सक किसी भी सूरत में एलोपैथिक दवा नहीं लिख सकते हैं. किंतु वर्तमान समय में जिले के विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष चिकित्सक धड़ल्ले से एलोपैथिक दवा लिख रहे हैं. इसे देख कर भी स्वास्थ्य विभाग के अलाधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं. किसी निजी क्लिनिक में ऐसी बात पायी जाती तो उस पर कब की कार्रवाई हो गयी रहती़ विदित हो कि जिले में वर्ष 2014 में एक बार ही आयुष दवा का आवंटन हुआ था़
उसके बाद आजतक आयुष दवा सरकारी अस्पतालों को आवंटित नहीं की गयी. फलत: आयुष चिकित्सक धड़ल्ले से एलोपैथ दवा ही रोगियों के पुर्जे पर लिखते हैं.
सरल व सस्ती चिकित्सा की थी योजना: सरकार ने आयुष चिकित्सा पद्धति को सर्वोत्तम चिकित्सा पद्धति मानते हुए इसे सरल और सस्ता बताया था़ साथ ही चिकित्सकों के खाली पड़े पदों को भरने के लिए सरकार ने चिकित्सकों की बहाली भी की़ सरकार का मानना था कि आयुष चिकित्सा पद्धति आरंभ होने से इलाज के खर्चों में काफी कमी आ जायेगी तथा हर वर्ग के लोगों को समुचित चिकित्सा सेवा का लाभ मिल पायेगा़ किंतु सरकार ने आयुष चिकित्सकों को बहाल तो कर लिया, लेकिन उन चिकित्सकों से एलोपैथिक दवा बंटवाना शुरू कर दिया. इससे सरकार की यह स्कीम पूरी तरह फ्लॉप हो गयी है.
एक दर्जन चिकित्सक हुए पदस्थापित: वर्ष 2010 के अगस्त महीने में बिहार सरकार द्वारा मुंगेर जिले के विभिन्न प्राथमिक केंद्रों में कुल 12 आयुष चिकित्सकों को पदस्थापित किया गया़ जिनमें से जमालपुर, बरियारपुर, असरगंज, तारापुर व संग्रामपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक-एक, धरहरा व टेटियाबंबर में 2-2 तथा हवेली खड़गपुर में 3 आयुष चिकित्सक को पदस्थापित किया गया़ मालूम हो कि मुंगेर जिले में आयुष चिकित्सक के कुल 20 पद स्वीकृत हैं, किंतु वर्तमान समय में 8 पद खाली पड़े हुए हैं.
कहते हैं सिविल सर्जन: सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ ने कहा कि सरकार के निर्देश पर ही आयुष चिकित्सक एलोपैथिक दवा लिख रहे हैं. सरकार ने इसके लिए लिखित निर्देश जारी किया है. इसमें कोई हानि नहीं है.

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