बदहाली. सदर अस्पताल पहुंच रहे हैं डेंगू रोगी, नहीं है इलाज की व्यवस्था
मुंगेर : डेंगू मरीजों के लिए सदर अस्पताल महज रेफर सेंटर बना हुआ है़ जहां डेंगू के मरीज तो पहुंच रहे हैं, पर यहां उसके इलाज की व्यवस्था नहीं है़ सदर अस्पताल में कागज पर तो डेंगू वार्ड की भी गिनती होती है, लेकिन बदहाल डेंगू वार्ड पर कई सवाल उठ रहे हैं. न तो इस वार्ड में चिकित्सकों व पारा मेडिकल स्टाफों की ड्यूटी लगती है और न ही वार्ड को ही सुसज्जित रखा गया है़ हाल यह है कि डेंगू रोगियों का इलाज नहीं होने के कारण मरीजों के लिए भागलपुर व पटना का रुख करना मजबूरी बन गयी है.
भागलपुर या पटना कर देते हैं रेफर : शनिवार को शहर के बिंदवारा शक्तिनगर निवासी डेंगू पीड़ित 50 वर्षीय नित्यानंद सिंह को सदर अस्पताल के पुरुष मेडिकल वार्ड में भर्ती कराया गया़ उसे चिकित्सक ने देखते ही उसके पुरजे पर रेफर टू भागलपुर अथवा पटना लिख दिया, पर मरीज की आर्थिक स्थित दयनीय होने के कारण वह न तो भागलपुर जा सका और न ही पटना़ मजबूरन उसे सदर अस्पताल में ही रहना पड़ा़ उसे इलाज के नाम पर सिर्फ सलाइन दिया जा रहा है, जबकि उसे प्लेटलेट्स चढ़ाये जाने की जरूरत है़
ऐसी स्थिति में अब मरीज को कुछ हो जाता है तो अस्पताल प्रबंधन तो पहले ही अपना हाथ खड़ा कर देगी कि उक्त मरीज को रेफर किया जा चुका है, वह अपनी मर्जी से ही अब भी अस्पताल में भर्ती है, जबकि असल में अस्पताल प्रबंधन के पास डेंगू के इलाज की सुविधा ही नहीं है़
डेंगू मरीज के इलाज की नहीं है सुविधा: चिकित्सकों की मानें तो डेंगू के मरीज का प्लेटलेट्स काफी तेजी से घटने लगता है़ इसके कारण उसे प्लेटलेट्स चढ़ाना बेहद जरूरी हो जाता है़ मालूम हो कि प्लेटलेट्स को ब्लड से तैयार किया जाता है, पर प्लेटलेट्स तैयार करने के लिए ब्लड सेपरेटर मशीन की जरूरत होती है, जो सदर अस्पताल में उपलब्ध नहीं है़
सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में ब्लड डोनेशन की सुविधा तो दी गयी है, पर यहां ब्लड सेपरेटर मशीन स्थापित नहीं किया गया है़ बिना ब्लड सेपरेटर मशीन के ब्लड से प्लेटलेट्स को अलग करना संभव नहीं है़ जब तक यह व्यवस्था अस्पताल में नहीं होगी, तब तक डेंगू मरीजों के लिए सदर अस्पताल रेफर सेंटर ही बना रहेगा़
कहते हैं पदाधिकारी
प्रभारी अस्पताल उपाधीक्षक डॉ सुधीर कुमार ने बताया कि फिलहाल तो सदर अस्पताल में प्लेटलेट्स चढ़ाने की सुविधा नहीं है़ हालांकि जिन मरीजों का प्लेटलेट्स एवरेज रहता है, उसे सलाइनिंग करके धीरे-धीरे रिकवर किया जाता है़
बदहाल है डेंगू वार्ड, परिजन घर से लाते हैं मच्छरदानी
अपनी उपलब्धि गिनाने मात्र के लिए अस्पताल प्रबंधन ने महिला मेडिकल वार्ड के सामने खाली पड़े एक भवन के उपर डेंगू वार्ड लिख तो दिया है, पर यहां अक्सर ताला ही लगा रहता है़ बताते चलें कि इस तथाकथित डेंगू वार्ड में दो गद्दा लगा है तथा चार बिना गद्दा का बेड लगा हुआ है़ वार्ड में तैनात रहने के लिए यहां चिकित्सक व पारा मेडिकल स्टाफों की ड्यूटी रोस्टर भी नहीं लगा हुआ है, जबकि वर्तमान में डेंगू का एक मरीज पुरुष सर्जिकल वार्ड में भर्ती कर दिया गया है़ बदहाली का आलम यह है कि उक्त मरीज को अस्पताल प्रबंधन द्वारा एक मच्छरदानी तक उपलब्ध नहीं कराया गया है़ इसके कारण मरीज के परिजनों ने अपने घर से ही एक फटी-पुरानी मच्छरदानी लाकर लगा दिया है़
