Motihari Urdu Library: शहर के मध्य स्थित 106 साल पुरानी ऐतिहासिक उर्दू लाइब्रेरी अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए आधुनिक स्टडी हब के रूप में विकसित हो रही है. यहां शांत वातावरण, हाईस्पीड इंटरनेट, बेहतर रीडिंग रूम और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों की उपलब्धता के कारण बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए पहुंच रहे हैं.
Motihari News: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपलब्ध हैं सभी जरूरी किताबें
लाइब्रेरी में सिविल सर्विस, बैंकिंग, रेलवे, एसएससी समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी पुस्तकों का समृद्ध संग्रह उपलब्ध है. इसके अलावा हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, अरबी और फारसी भाषाओं की दुर्लभ पुस्तकें तथा दैनिक समाचार पत्र भी पाठकों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं.
1920 में हुई थी स्थापना, शिक्षा और शोध का बना केंद्र
जिला मुख्यालय स्थित उर्दू लाइब्रेरी (उर्दू कुतुब-ख़ाना) की स्थापना वर्ष 1920 में हुई थी. उत्तर बिहार के सबसे पुराने पुस्तकालयों में शामिल यह लाइब्रेरी वर्षों से शिक्षा, शोध और सांप्रदायिक सौहार्द का केंद्र रही है. यहां विभिन्न धर्मों के पवित्र ग्रंथों और इतिहास से जुड़ी हजारों दुर्लभ पुस्तकें सुरक्षित हैं.
ई-लाइब्रेरी सुविधा से डिजिटल पढ़ाई को भी मिल रहा बढ़ावा
नई पीढ़ी को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए लाइब्रेरी में ई-लाइब्रेरी सॉफ्टवेयर भी स्थापित किया गया है. लाइब्रेरी के सचिव अधिवक्ता अजमुद्दीन हाशमी ने बताया कि युवाओं को बेहतर अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराना ही उद्देश्य है, ताकि वे बिना किसी बाधा के अपने लक्ष्य की तैयारी कर सकें.
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र का भी रहा जुड़ाव
लाइब्रेरी का जुड़ाव बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र सहित कई साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों से रहा है. आने वाले समय में यहां और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं.
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