Motihari News: मोतिहारी. गांधी संग्रहालय में चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के पुरोधा और महात्मा गांधी को बिहार की धरती पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पंडित राजकुमार शुक्ल की जयंती पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गयी. कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने गांधी संग्रहालय परिसर स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया. इस दौरान उनके योगदान को याद करते हुए भारत रत्न देने की मांग भी उठी.
किसानों की पीड़ा के सशक्त प्रतिनिधि थे राजकुमार शुक्ल
गांधी संग्रहालय के सचिव अधिवक्ता विनय कुमार सिंह ने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल चंपारण के किसानों की पीड़ा और नीलहों के अत्याचार के खिलाफ संघर्ष के सशक्त प्रतिनिधि थे.
उन्होंने कहा कि राजकुमार शुक्ल ने महात्मा गांधी से लगातार आग्रह कर उन्हें चंपारण आने के लिए प्रेरित किया. उनके प्रयासों ने चंपारण के किसानों की समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.
शुक्ल के प्रयास से 1917 में चंपारण पहुंचे गांधी
पूर्व प्राचार्य शशिकला ने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल के दृढ़ संकल्प और संघर्ष के परिणामस्वरूप वर्ष 1917 में महात्मा गांधी का चंपारण आगमन हुआ. इसके साथ ही चंपारण सत्याग्रह का ऐतिहासिक अध्याय शुरू हुआ.
उन्होंने कहा कि राजकुमार शुक्ल का संघर्ष चंपारण के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा.
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देता है जीवन
अधिवक्ता शंभुशरण सिंह ने कहा कि राजकुमार शुक्ल का जीवन अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने, किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने और अपने उद्देश्य के प्रति अडिग रहने की प्रेरणा देता है.
उन्होंने कहा कि चंपारण सत्याग्रह की सफलता में राजकुमार शुक्ल के योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा.
भारत रत्न देने की उठी मांग
सामाजिक कार्यकर्ता विनय कुमार ने पंडित राजकुमार शुक्ल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सरकार से उन्हें भारत रत्न देने की मांग की. उन्होंने कहा कि उनके विचारों और संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है.
कार्यक्रम में उप मेयर डॉ. लालबाबू प्रसाद, डॉ. कमलेश कुमार, नीरज कुमार, दीपक पटेल, विनोद कुशवाहा सहित गांधी संग्रहालय के दर्जनों सदस्यों ने पंडित राजकुमार शुक्ल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.
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