Motihari News: संग्रामपुर स्थित गंडक दियारा क्षेत्र के किसानों पर कुदरत का कहर टूटा है. इस साल बेमौसम बारिश और गंडक नदी के जलस्तर में हुई अप्रत्याशित वृद्धि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. सैकड़ों एकड़ में फैली तरबूज, खरबूज, खीरा और कद्दू की फसलें जलजमाव के कारण बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई हैं. गर्मी के मौसम में जिस तरबूज को ‘लाल शरीर के लिए लाल खून’ कहा जाता है, वही फसल अब खेतों में सड़ रही है.
लीज की जमीन और भारी निवेश डूबा
गंडक दियारा की रेतीली जमीन पर हजारों किसान हर साल करीब पांच महीने की कड़ी मेहनत से खेती करते हैं. इस खेती के लिए किसान ऊंची दरों पर जमीन लीज पर लेते हैं. एक एकड़ जमीन का किराया एक सीजन के लिए लगभग 10 हजार रुपये तक चुकाना पड़ता है. किसानों ने बताया कि किसी ने 10 बीघा तो किसी ने 5 बीघा जमीन कर्ज लेकर लीज पर ली थी. बीज, खाद और सिंचाई में किए गए भारी निवेश के बाद अब फसल डूबने से किसानों की आर्थिक कमर टूट गई है.
चार दिनों से जलजमाव, सड़ने लगी फसल
पिछले चार दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण खेतों में जलजमाव की स्थिति बनी हुई है. किसान लक्ष्मण साहनी, शंभू यादव और सुमन कुमार का कहना है कि यदि जल्द ही पानी की निकासी नहीं हुई, तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी. तरबूज के फल पानी में डूबे रहने के कारण सड़ने लगे हैं. किसानों ने बताया कि उन्होंने साहूकारों से कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन अब उपज की उम्मीद खत्म होने से कर्ज चुकाने का संकट गहरा गया है.
मुआवजे की गुहार
लगातार हो रहे नुकसान से गंडक दियारा के किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक हो गई है. प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से फसल क्षति का आकलन कर उचित मुआवजे की मांग की है. किसानों का कहना है कि उनकी आय का एकमात्र स्रोत यही खेती है, और इसके बर्बाद होने से उनके सामने परिवार के भरण-पोषण की समस्या खड़ी हो गई है.
मोतिहारी से अभिषेक कुमार की रिपोर्ट
