कोटवा से शिवम कुमार की रिपोर्ट
Motihari News: कझिया स्थित एक महाविद्यालय के गेट के बाहर छात्र रितेश यादव की दिनदहाड़े हुई हत्या ने परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है. इस सनसनीखेज वारदात के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है. लोगों का सीधा आरोप है कि यदि परीक्षा केंद्र पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती होती, तो शायद रितेश की जान बच सकती थी. गेट पर सुरक्षा के अभाव में अपराधियों ने बड़ी आसानी से सैकड़ों लोगों के बीच घटना को अंजाम दिया और चलते बने.
प्रधानाध्यापक और पुलिस के दावों में विरोधाभास
सुरक्षा में चूक को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. कॉलेज के प्रधानाध्यापक का दावा है कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रशासन को आधिकारिक पत्र भेजकर पुलिस बल की मांग की गई थी. दूसरी ओर, कोटवा थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. थानाध्यक्ष का कहना है कि थाना स्तर पर सुरक्षा से जुड़ा ऐसा कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है.
घटना के बाद जागी प्रशासनिक नींद
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब परीक्षा 8 मई से ही जारी थी, तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पहले क्यों नहीं किए गए. थानाध्यक्ष के मुताबिक, हत्या की वारदात होने के बाद आज अंचलाधिकारी (सीओ) ने फोन कर पुलिस बल की मांग की है. इस देरी ने प्रशासनिक समन्वय और संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है. फिलहाल पूरा मामला जांच के घेरे में है कि आखिर पत्र कहां अटका और इस भारी चूक का असली जिम्मेदार कौन है.
