मोतिहारी के मधुबन से शशि चंद्र तिवारी की रिपोर्ट
Madhuban News: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं सिस्टम की उदासीनता के कारण कैसे दम तोड़ती हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण मधुबन प्रखंड परिसर में दिख रहा है. यहां वर्ष 2011-12 में शुरू हुआ ई-किसान भवन का निर्माण 15 साल बाद भी अधूरा है. आलम यह है कि एक करोड़ 14 लाख रुपये की लागत से बनने वाला यह भवन अब खंडहर में तब्दील होने लगा है.
11 वर्षों से लटका है काम
बताया जाता है कि निर्माण शुरू होने के बाद छत की ढलाई तो हुई, लेकिन पिछले 11 वर्षों से काम पूरी तरह ठप है. न प्लास्टर हुआ और न ही फर्नीचर का काम शुरू हो सका. फिलहाल, इस आधे-अधूरे और असुरक्षित भवन में एक आधार केंद्र संचालित किया जा रहा है. रखरखाव के अभाव में भवन के हिस्से अब टूटने लगे हैं.
सुविधाओं से वंचित हैं किसान
इस भवन को आधुनिक सुविधाओं जैसे मिट्टी जांच लैब, किसान प्रशिक्षण हॉल, इंटरनेट सुविधा और अधिकारियों के आवास के लिए बनाया जाना था. लेकिन भवन तैयार न होने के कारण वर्तमान में कृषि कार्यालय सीआरपीएफ के एक पुराने भवन में चल रहा है. इससे किसानों को तकनीकी जानकारी और विभागीय सुविधाओं के लिए भटकना पड़ता है.
क्या कहते हैं अधिकारी?
प्रखंड कृषि पदाधिकारी (BAO) मुनेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि भवन की जर्जर और अधूरी स्थिति से वरीय अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है. निर्माण पूरा कराने के लिए विभाग को पत्र भेजा गया है. वहीं, स्थानीय किसानों ने जल्द से जल्द काम पूरा करने की मांग की है ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ एक छत के नीचे मिल सके.
