Motihari News: बिहार के स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटरों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. पूर्वी चंपारण जिले के सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में तैनात इन कर्मियों को जनवरी 2026 से वेतन नहीं मिला है. हैरानी की बात यह है कि इनके भविष्य निधि (EPF) खाते में भी जनवरी महीने से एक रुपये का अंशदान जमा नहीं किया गया है.
अस्पतालों की ‘डिजिटल रीढ़’ के सामने भुखमरी की स्थिति
स्वास्थ्य विभाग की पूरी व्यवस्था को पेपरलेस और डिजिटल बनाने में इन डाटा ऑपरेटरों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. ये कर्मी ओपीडी-आईपिडी में मरीजों का डेली रजिस्ट्रेशन, दवा वितरण का ऑनलाइन रिकॉर्ड, आयुष्मान कार्ड, ई-संजीवनी और अन्य डिजिटल पोर्टलों का संचालन करते हैं. इसके बावजूद इनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है. 5 महीने से मानदेय नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है. दुकानदारों ने उधार देना बंद कर दिया है और बच्चों की स्कूल फीस से लेकर बीमार माता-पिता की दवा का खर्च उठाना अब इनके बस से बाहर हो रहा है.
काम ठप हुआ तो चरमरा जाएगी पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था
पीड़ित कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है. यदि जल्द ही जनवरी से लेकर अब तक के बकाए वेतन का भुगतान और ईपीएफ की राशि खाते में जमा नहीं की गई, तो सभी कर्मी काम ठप करने को मजबूर होंगे. अगर ऐसा हुआ तो पूरे पूर्वी चंपारण जिले के सरकारी अस्पतालों में मरीजों का निबंधन, दवा वितरण और आयुष्मान कार्ड बनने का काम पूरी तरह ठप हो जाएगा, जिससे आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी.
मोतिहारी से राज निखिल सिंह की रिपोर्ट
