नेपाल बाढ़ का असर: खतरे के बीच प्रशासन ने खाली कराए घर, माइकिंग कर लोगों को किया सतर्क

नेपाल में भूकंप के बाद भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ से रसुवा और नुवाकोट जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं. प्रशासन ने संभावित खतरे को देखते हुए नागरिकों को घरों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है.

Nepal Flood: रक्सौल. चीन की ओर से आने वाली भोटेकोशी नदी में भूकंप के बाद अचानक आई बाढ़ से नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं. धादिंग और भरतपुर समेत अन्य इलाकों में भी भौतिक संरचनाओं को नुकसान पहुंचा है. वहीं नारायणघाट और मुग्लिंग में संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने नेपाली नागरिकों के साथ भारतीय नागरिकों को भी घरों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है.

नेपाल बाढ़ के बीच प्रशासन ने कराया माइकिंग

रक्सौल के ब्लॉक रोड निवासी नारायण गुप्ता नारायणघाट में कारोबार करते हैं. उन्होंने फोन पर बताया कि सुबह करीब 11 बजे प्रशासन की ओर से माइकिंग कर दुकानों को बंद कराया गया.

इसके बाद लोगों को घर छोड़कर पहाड़ी इलाके में सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया. नारायण गुप्ता ने बताया कि दुकान बंद करने के बाद वे घर पहुंचे और अपने बच्चों के साथ सुरक्षित स्थान पर चले गए.

बच्चों के साथ सुरक्षित जगह पहुंचे नारायण गुप्ता

नारायण गुप्ता ने बताया कि प्रशासन के निर्देश के बाद उन्होंने परिवार के साथ सुरक्षित स्थान पर शरण ली. बाढ़ के खतरे के कारण इलाके में लोगों के बीच चिंता का माहौल बना रहा.

प्रशासन की ओर से लगातार लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जाती रही.

डर के साये में बीता दिन : भोरेलाल महतो

आदापुर निवासी भोरेलाल महतो भी नेपाल में रहते और कारोबार करते हैं. उन्होंने बताया कि बाढ़ के खतरे के बीच पूरा दिन डर के साये में बीता.

उन्होंने कहा कि लोग भगवान को याद करते हुए दिन गुजारते रहे. हालांकि राहत की बात यह रही कि नारायणघाट इलाके में बाढ़ के कारण किसी तरह की मानवीय क्षति की सूचना नहीं है.

भारतीय नागरिक भी प्रशासन की निगरानी में

नेपाल के प्रभावित इलाकों में रहने वाले भारतीय नागरिकों के साथ नेपाली नागरिकों को भी प्रशासन की ओर से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. प्रशासन की प्राथमिकता संभावित बाढ़ के खतरे वाले क्षेत्रों से लोगों को समय रहते निकालना है.

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लेखक के बारे में

By मनोज कुमार गुप्ता

मनोज कुमार गुप्ता बीते 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वह प्रिंट, रेडियो और डिजिटल माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. वर्तमान में भारत-नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र से रिपोर्टिंग करते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों, सीमा सुरक्षा और नेपाल की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं. सामाजिक सरोकारों में गहरी रुचि के साथ वे क्षेत्र की जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाने और उनके समाधान के प्रयासों के लिए जाने जाते हैं.

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